भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे पार्टी की सभा के दौरान मंच पर खड़े होकर कार्यकर्ताओं से अपने लिए लाई गई फूलों की माला के दाम पूछते दिखाई दे रहे हैं, इसके बाद वे वहां लगाए गए पंडाल के लिए खर्च किए गए रुपयों का हिसाब भी पूछते हैं। दरअसल इस जानकारी को लेने के बाद दिग्विजय पार्टी कार्यकर्ताओं को आगे होने वाली बैठकों में इन चीजों पर पैसा खर्च नहीं करने की सलाह देते हैं।
दिग्विजय सिंह कहते हैं, ‘अगली मीटिंग में इतनी बड़ी-बड़ी मालाओं की जरूरत नहीं। हम सरकार में नहीं विपक्ष में हैं, और फूल-मालाओं व पंडाल पर पैसा खर्च करने से बेहतर है कि उन्हें आप मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी को दान कर दें।’ साथ ही मंच से बोलते हुए सिंह ने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी खत्म करने की सलाह भी दी।
सिंह ने कहा, ‘दस हजार रुपए का पंडाल लगाने की जरूरत नहीं है। हम लोग पेड़ के नीचे बैठेंगे। आप लोग फर्श बिछाओ, हम सब नीचे बैठेंगे।’ कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा, ‘अरे हमें लड़ाई लड़ना है, हम मंच पर बैठें, आप नीचे बैठो, ये ठीक नहीं। अरे हम सभी फर्श पर बैठकर लड़ाई लडेंगे, है ना।’
आगे उन्होंने कहा, ‘नेता और कार्यकर्ताओं के बीच की जो दूरी है ना, वो दूरी हम लोगों को खत्म करनी पड़ेगी। और यह दूरी तब खत्म होगी, जब हम लोगों का दिमाग तुम (कार्यकर्ता) ठीक रखोगे। नहीं तो हम मंच पर आए, पंडाल में गए, मंच पर बैठ गए, बड़ी-बड़ी मालाएं पहनीं, भाषण ठोंका और चले गए। इससे काम नहीं चलेगा।’
कांग्रेस के पूर्व महासचिव ने ये बातें मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की एक सभा के दौरान कही, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि यह वीडियो कहां का है फिलहाल इस बात का पता नहीं चल सका है।
हमारी सरकार नहीं है, हज़ार रुपये की माला लाने से अच्छा है, पीसीसी में दान कर दो
मंच बनाने की भी जरूरत नहीं, हम पेड़ के नीचे फर्श पे बैठेंगे, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का मजाकिया अंदाज़
फिर उन्होंने कहा- ‘अब वो 1 हजार जो है, सरकार हमारी नहीं है, हम लोग विपक्ष में है, तो वो एक हजार रुपए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी को दान दे दिया करो।’
आगे उन्होंने पूछा- ‘पंडाल कितने में लगा है।’
जवाब सुनकर उन्होंने कहा- ‘दस हजार का, अरे पेड़ के नीचे हम लोग बैठेंगे, फर्श लगाओ, नीचे बैठेंगे। अरे लड़ाई लड़ना है। हम मंच पर बैठें, आप नीचे बैठो, अरे हम सब फर्श पर बैठकर लड़ाई लड़ेंगे। है ना
फिर उन्होंने कहा- ‘नेता और कार्यकर्ताओं के बीच की जो दूरी है ना, वो दूरी खत्म करनी पड़ेगी हम लोगों को। और यह दूरी तब खत्म होगी, जब हम लोगों का दिमाग तुम ठीक रखोगे। नहीं तो हम मंच पर आए, पंडाल में गए, मंच पर बैठ गए, बड़ी-बड़ी मालाएं पहनीं, भाषण ठोंका और चले गए। इससे काम नहीं चलेगा।’





