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गुजरात और महाराष्ट्र में भारी बारिश, IMD ने जारी किया अलर्ट

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नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में मौसम में बदलाव देखने को मिला है। दक्षिण भारत में एक बार फिर से बारिश (Rain Alert) का दौर शुरू है। कई जगहों पर रिकॉर्ड बारिश देखने को मिल रही है। वहीं, उत्तर भारत के कई राज्यों में अभी भी गर्मी का सितम देखने को मिल रहा है।
इस बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना है। वहीं, सोमवार को गुजरात और मुंबई में भारी बारिश देखने को मिली। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बार महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने मुंबई में बारिश को लेकर ऑरेंज और पालघर में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।

गुजरात में लगातार भारी बारिश के कारण हालात खराब हो गए हैं। कई जगहों पर बारिश के कारण जल जमाव की स्थिति है, जिसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच राज्य के सीएम भूपेंद्र पटेल ने एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा कि सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के विभिन्न जिलों में भारी बारिश को देखते हुए जिला कलेक्टरों को नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए कदम उठाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुरूप लोगों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और रुके हुए पानी की तेजी से निकासी, बिजली और खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य और जीवन रक्षक दवाओं सहित मामलों में पूरी सतर्कता और दूरदर्शिता के साथ तैयार रहने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टरों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे नागरिकों को भारी बारिश में सावधान रहने और नदियों, नालों या बहते पानी को पार न करने के निर्देश देते रहें।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 16 से 22 जून के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में छिटपुट से भारी बारिश की संभावना है। जिससे गर्मी से राहत मिलेगी। इसके अलावा 16 और 17 जून को राजस्थान में वज्रपात की संभावना है। उत्तराखंड में भी अगले 4 दिनों तक तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। वहीं, दिल्ली में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला देखने को मिल सकता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 16-18 जून के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, केरल और माहे, लक्षद्वीप, कर्नाटक में कई जगहों पर हल्की से मध्य बारिश की संभावना है। वहीं, कुछ जगहों पर तेज हवाएं चल सकती है।

इसके अलावा 16-18 जून के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, केरल और माहे, कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है, 16 तारीख को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।