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अखंड भारत की बुलंद आवाज हैं, इंदिरा गांधी : श्रीनिवास बी वी

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भारतीय युवा कांग्रेस ने आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के शहादत दिवस पर रक्तदान महाअभियान का किया आयोजन

नई दिल्ली। भारतीय युवा कांग्रेस ने आज पूर्व प्रधानमंत्री आयरन लेडी स्व. इंदिरा गांधी के शहादत दिवस पर रक्तदान महाअभियान का आयोजन किया और भारत के लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए युवा कांग्रेस ने उन्हें भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस रक्तदान महाअभियान में कई वरिष्ठ कांग्रेस पार्टी के नेतागण भी शामिल हुए, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष श्री अरविंदर सिंह लवली, राज्यसभा सांसद जेबी मैथर, जय प्रकाश अग्रवाल, कांग्रेस प्रवक्ता व सीडब्ल्यूसी सदस्य अलका लांबा, एआईसीसी सचिव अभिषेक दत्त, और विधायक दीपिका पांडेय आदि शामिल हुए।

इस अवसर पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने कहा कि देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री आयरन लेडी इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर हम उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। स्व. इंदिरा गांधी ने देश को मजबूत करने के लिए अनेकों कदम उठाए, उन्होंने अध्यादेश द्वारा देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। यह इंदिरा जी का साहस ही था जिसके चलते 1971 में पाकिस्तान की शर्मनाक हार हुई और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इंदिरा गांधी ने साल 1971 में संविधान में संशोधन करके राजभत्ते, प्रिवी पर्स की प्रथा को खत्म किया। 1974 में स्माइलिंग बुद्धा ऑपरेशन के तहत परमाणु परीक्षण कर भारत को एक नई ताकत दी। पांचवी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत गरीबी हटाओ का नारा दिया और देश से निर्धनता समाप्त करने के बीस सूत्रीय कार्यक्रमों का निर्धारण किया।

श्रीनिवास बी वी ने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी का राजनैतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, अपनी आलोचनाओं से वह घबराई नहीं बल्कि उनका सामना किया और आगे बढ़ीं। अपने फौलादी व्यक्तित्व और सकारात्मक दृष्टिकोण की वजह से विश्व में उन्हें सबसे ताकतवर महिलाओं की श्रेणी में गिना जाता है। भारतीय राजनीति में उनके निर्णयों को मिसाल के तौर पर देखा जाता है। आज भी कई युवा इंदिरा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं।

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली प्रभारी कोको पाढ़ी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हम सभी के लिए निर्भयता, दृढ़ संकल्प और कुशल नेतृत्व की मिसाल हैं। उन्होंने इस देश की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया, हम उन्हे आज के दिन नमन करते है। आज स्व. इंदिरा गांधी के शहादत दिवस पर रक्तदान महाअभियान का आयोजन किया गया, जिसमे तकरीबन 254 यूनिट ब्लड युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा इकट्ठा किया गया।

इस अवसर पर भारतीय युवा के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली प्रभारी कोको पाढ़ी, राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली सह प्रभारी खुशबू शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव विनीत कंबोज, राष्ट्रीय सचिव मो. शाहिद, प्रदीप सूर्या, विजय सिंह राजू, अरूणा महाजन, शेष नारायण ओझा, संजीता सिहाग, योगेश हांडा, दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रणविजय सिंह लोचव समेत अनेकों युवा कांग्रेस के कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे। यह जानकारी युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी वरुण पांडे ने दी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।