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इन कलाकारों की प्रेरक यात्राएँ: संघर्ष से सफलता तक की कहानी, पढ़िए पूरी खबर

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नई दिल्ली। विभिन्न क्षेत्रीय कलाकारों ने अपनी प्रेरक यात्राओं के बारे में चर्चा की, जिनमें स्टैंडअप कॉमेडियन और एंकर मयंक झा से लेकर गायक रूशिल यादव, मॉडल और एंकर मोहम्मद हैदर मुख्तार खान, गायक सुजल जैन और डांस कोरियोग्राफर राहुल राठौड़ शामिल हैं। इन सभी ने अपने संघर्ष, मेहनत और कला के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक कहानियां साझा की, जिससे यह साबित होता है कि सही दिशा और जुनून के साथ किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।

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मध्य प्रदेश के भोपाल से ताल्लुक रखने वाले मयंक झा, जो एक स्टैंडअप कॉमेडियन और एंकर के रूप में जाने जाते हैं, ने अपनी कला यात्रा के बारे में बात की। मयंक ने 2017 में स्टैंडअप कॉमेडी के क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन उनका पहला अनुभव 2014 में रविन्द्र भवन भोपाल में हुआ था, जब उन्होंने 1000 लोगों के सामने स्टैंडअप शो किया। मयंक का कहना है कि बचपन से ही उनके परिवार में हंसी मजाक की परंपरा रही है, जो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। उनके पिता का कहना था, “चार दिन की जिंदगी है, हंसी खुशी गुजारो, लोग याद रखेंगे,” और यही सोच उनके पेशेवर जीवन की दिशा तय करने में मददगार साबित हुई।

एंकरिंग की ओर मयंक का रुझान
मयंक ने 2018 में एंकरिंग की दिशा में कदम बढ़ाया, जब उन्हें लोगों ने बताया कि उनकी आवाज़ और उच्चारण में एक खास魅力 है। हालांकि, स्टैंडअप और एंकरिंग दोनों क्षेत्र मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन मयंक ने कभी स्टैंडअप को छोड़ने का विचार नहीं किया। उन्होंने बताया कि स्टैंडअप से पैसे की कमी के कारण उन्होंने एंकरिंग को प्राथमिकता दी, क्योंकि यह उन्हें आर्थिक तौर पर ज्यादा स्थिरता प्रदान कर रहा था। धीरे-धीरे मयंक ने कई बड़े इवेंट्स को होस्ट करना शुरू किया, जिनमें वेडिंग्स, कॉर्पोरेट इवेंट्स और फेस्टिवल्स शामिल थे। उनका मानना है कि एंकरिंग के क्षेत्र में लोग उन्हें अब पहचानने लगे हैं, लेकिन स्टैंडअप कॉमेडी के लिए उनका प्यार अभी भी कायम है।

आने वाले समय में मयंक का लक्ष्य
मयंक झा ने बताया कि आने वाले वर्षों में वह स्टैंडअप कॉमेडी के क्षेत्र में और भी सफलता हासिल करना चाहते हैं। उनका सपना है कि वह अपने स्टैंडअप शो के वीडियो को ग्लोबली शेयर करें ताकि उनकी पहुंच बढ़ सके। मयंक का कहना है, “अगर आप एक आर्ट फॉर्म को पूरी मेहनत से करते हैं, तो समय के साथ वह आपको सफलता जरूर देता है।” साथ ही, वह नए कलाकारों को संदेश देते हुए कहते हैं कि इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत और समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि अगर आपने सही तरीके से काम किया, तो आर्ट आपको बहुत कुछ दे सकती है।

मध्य प्रदेश के भोपाल से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद हैदर मुख्तार खान ने अपनी बहुआयामी यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने अपनी शिक्षा भोपाल से प्राप्त की, जिसमें इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग और सेल्स एंड मार्केटिंग में मास्टर डिग्री शामिल है। इसके बाद, उन्होंने टेक महिंद्रा में काम किया और वर्तमान में वह अमेज़ॅन में क्वालिटी इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा, हैदर ने अपनी हॉबी को भी प्राथमिकता दी और 2022 में मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा, जहां उन्होंने पहले ही प्रयास में फर्स्ट रनर अप का खिताब जीता। उन्होंने अपने मॉडलिंग करियर के दौरान कई बड़े अवार्ड्स और ब्यूटी टाइटल्स भी हासिल किए हैं।

मॉडलिंग और एंकरिंग के साथ-साथ समाज सेवा में भी योगदान
हैदर का कहना है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में की, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने मॉडलिंग और एंकरिंग में सफलता प्राप्त की, उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी शुरू की। वह मुंबई स्थित एक एनजीओ से जुड़े हुए हैं, जो एड्स और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। उन्होंने अपनी पहल को और बढ़ाने के लिए कई दान कार्य भी किए हैं, जिसके लिए उन्हें एक अवार्ड भी प्राप्त हुआ। हैदर का मानना है कि मॉडलिंग और एंकरिंग उनके लिए एक अतिरिक्त खुशी का कारण बने हैं, लेकिन उनका मुख्य फोकस हमेशा उनका कॉर्पोरेट करियर रहा है, जो उन्हें संतुष्टि और स्थिरता प्रदान करता है।

आने वाले समय में ग्लोबल पहचान की ओर बढ़ते कदम
मोहम्मद हैदर मुख्तार खान का सपना है कि वह भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करें। वह जल्द ही मिस्टर यूनिवर्स इंडिया प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे हैं, जहां वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनका उद्देश्य है कि वह अपने देश को गर्व महसूस कराए और पूरे भारत को एक नई दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करें। हैदर का मानना है कि उनका काम केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उन्हें अपनी सफलता से समाज और अपने देश को लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है। वह आने वाले समय में अपने क्षेत्र में और अधिक सफलता हासिल करना चाहते हैं, ताकि वह भारत को ग्लोबली एक मजबूत पहचान दिला सकें।

मध्य प्रदेश के मुरैना से ताल्लुक रखने वाले गायक सुजल जैन ने अपनी संगीत यात्रा के बारे में बताया, जिसमें उनका बचपन से ही संगीत के प्रति गहरी रुचि रही है। उनके पिता जो शास्त्रीय और बॉलीवुड संगीत के जानकार थे, ने उन्हें बचपन में ही संगीत से जुड़ा पहला अनुभव दिया। सुजल जैन ने अपने पिता से ही कुछ बेसिक संगीत की ट्रेनिंग ली, जिसके बाद उन्हें फॉर्मल ट्रेनिंग की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने मुरैना से बाहर अपने गुरु सुभाष देशपांडे से गायक बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस मार्गदर्शन ने उन्हें कई महत्वपूर्ण अवसरों तक पहुँचाया, जैसे तानसेन समारोह और अन्य संगीत शोज़ में प्रदर्शन।

तानसेन समारोह से लेकर अन्य बड़े मंचों तक का सफर
सुजल जैन का मानना है कि तानसेन समारोह ने उनके संगीत करियर में एक अहम मोड़ लाया। बचपन से तानसेन समारोह में भाग लेने की उनकी इच्छा पूरी हुई, और इसे उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे यादगार अनुभव बताया। इसके बाद उन्होंने इंदौर, बैंगलोर, जयपुर, छिंदवाड़ा और अन्य शहरों में भी शोज़ किए। इन मंचों पर प्रदर्शन करने से उनका आत्मविश्वास और अनुभव दोनों ही बढ़े। इसके साथ ही, सुजल जैन ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए, जिनमें ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नेशनल यूथ फेस्टिवल और चंबल संगीत रत्न अवार्ड शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इन पुरस्कारों को कभी भी घमंड का कारण नहीं बनने दिया और हमेशा गुरु से मिली सीख पर ध्यान केंद्रित रखा।

आने वाले समय में संगीत के प्रति और गहरी प्रतिबद्धता
आने वाले समय में, सुजल जैन का उद्देश्य संगीत की ओर अपनी यात्रा को और अधिक गहरा करना है। वह अपनी गायन क्षमता को और निखारने के लिए और अच्छे गुरुओं से सीखने के लिए तत्पर हैं। उनका मानना है कि संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और वह जीवन के हर पहलू को संगीत से जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका सपना है कि वह संगीत के क्षेत्र में और अधिक उच्च मानकों तक पहुंचें और अपने देश को गर्व महसूस कराएं। उनकी इच्छा है कि वह एक दिन दुनिया के बड़े मंचों पर गायन कर भारत का नाम रोशन करें।

भोपाल के गायक और आगाज़ बैंड के को-फाउंडर, रूशिल यादव ने अपनी संगीत यात्रा के बारे में बात करते हुए कहा कि वह खुद को एक कलाकार के रूप में लगातार इवॉल्व करना चाहते हैं। उनका मानना है कि टैलेंट में सीमितता होती है, खासकर जब बात गायक के गले की शारीरिक सीमा की हो, इसलिए वह हमेशा अपने हुनर को एक नए स्तर तक ले जाने की कोशिश करते हैं। रूशिल ने स्कूल के समय से ही मंच पर प्रदर्शन करना शुरू किया, खासकर महर्षि देवंदर स्कूल में जहाँ उन्हें बड़े स्टेज पर गाने का मौका मिला। इस अनुभव ने उन्हें आत्मविश्वास और मंच पर प्रदर्शन की कला सिखाई, जो उनके संगीत करियर की नींव बनी।

आगाज़ बैंड के साथ सफलता और संगीत के प्रति प्रतिबद्धता
रूशिल यादव का मानना है कि संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और उनका यह समर्पण समय के साथ लगातार बढ़ता जा रहा है। आगाज़ बैंड के साथ काम करते हुए उन्होंने कई बड़े शोज़ किए हैं, जिनमें रविंद्र भवन में किशोर कुमार को श्रद्धांजलि देने वाला “शाम मस्तानी” ट्रिब्यूट शो प्रमुख था। इस बैंड ने इंडियन आइडल के दो फाइनलिस्ट के साथ भी प्रदर्शन किया, जो उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। रूशिल के अनुसार, संगीत में सफलता पाने के लिए मेहनत सबसे जरूरी है और वह मानते हैं कि यदि कोई कलाकार कठिन परिश्रम नहीं करता, तो वह सिर्फ औसत दर्जे का ही रह जाता है।

संगीत के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए मेहनत और मोडेस्ट्री की अहमियत
रूशिल यादव का मानना है कि संगीत के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए सिर्फ टैलेंट ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लगातार मेहनत और सही दिशा में काम करने की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि युवा कलाकारों को शुरुआत में अपनी बेसिक्स को समझकर काम करना चाहिए और पूरी तरह से अपने लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए। इसके साथ ही, वह कहते हैं कि किसी भी कलाकार को सफलता के बाद भी अपनी विनम्रता बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि मोडेस्ट्री ही आपको लंबे समय तक सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें पुराने गाने बहुत पसंद हैं, और वह हमेशा कोशिश करते हैं कि इन गानों के नए संस्करण बनाएं, खासकर किशोर कुमार और रफ़ी साहब के गाने।

भोपाल टैलेंट स्टूडियो के संस्थापक और कोरियोग्राफर राहुल राठौड़ ने अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि उनका शुरुआती सफर जिमनास्टिक से शुरू हुआ था, जहाँ उन्होंने नेशनल लेवल तक खेला। बाद में एक दोस्त के कहने पर उन्होंने डांस की ओर रुख किया और अमर सिंह चंदे से मुफ्त में ट्रेनिंग प्राप्त की। राहुल ने बताया कि उनके गुरु ने उन्हें डांस में सफलता की दिशा दिखाई और आज वह एक सफल डांस कोरियोग्राफर के रूप में पहचान बना चुके हैं। 2015 में उन्होंने भोपाल में अपना पहला डांस स्टूडियो खोला, जो आज भी संचालित है और यहां के छात्रों ने कई रियलिटी शो में हिस्सा लिया है, यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

चुनौतियों से जूझते हुए बदलती मानसिकता
राहुल ने यह भी कहा कि डांस को लेकर समाज में अभी भी कुछ पूर्वाग्रह बने हुए हैं। लोग डांस को केवल एक शौक के तौर पर ही देखते हैं और यह मानते हैं कि इससे कोई भविष्य नहीं होता। हालांकि, पिछले कुछ सालों में डांस और अन्य कला रूपों के प्रति मानसिकता में बदलाव आया है और अब कई कलाकार रियलिटी शोज़ में भाग लेकर अपनी पहचान बना रहे हैं। राहुल के मुताबिक, उनके छात्रों ने दुबई जैसे देशों में भी काम किया है और कई लोग अपने खुद के डांस स्कूल चला रहे हैं। वह मानते हैं कि डांस के पेशे में अब बेहतर आर्थिक संभावनाएं हैं, जो पहले कभी नहीं थीं, और यह पेशा अब एक सम्मानजनक करियर के रूप में सामने आया है।

डांस के क्षेत्र में काम करने का अनुभव और भविष्य की योजनाएं
राहुल ने बताया कि डांस के विभिन्न रूपों में उनकी विशेष रुचि है, जैसे बॉलीवुड, हिप-हॉप, सालसा और ब्रेकडांस। उनका स्टूडियो विभिन्न प्रकार के डांस शैलियों की ट्रेनिंग प्रदान करता है, और छात्रों को उनके पसंदीदा स्टाइल में माहिर बनाने के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि डांस में जितनी विविधताएं हैं, उतना ही समर्पण और मेहनत जरूरी है। उनकी टीम को हर जगह से वापस बुलाया जाता है, खासकर स्कूल फंक्शन्स और वेडिंग शोज़ में। राहुल का कहना है कि डांस में भविष्य बहुत उज्जवल है, और वह आने वाले समय में इसे और भी अधिक पेशेवर तरीके से सिखाने की दिशा में काम करेंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।

बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

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