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इन महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियाँ: बेकिंग से फैशन और रैंप पर क्राउन तक, हर सफर में छुपा है एक नया प्रेरणा का खजाना

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नई दिल्ली। आज की हमारी खास पेशकश में, हम बात करेंगे उन लोगों की, जिन्होंने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर अपने सपनों को हकीकत में बदला। चाहे वह बेकिंग की दुनिया हो, फैशन की चमक-धमक, या रैंप पर क्राउन पहनने का सफर—हर कहानी आपको कुछ नया सिखाएगी। तो आइए, जानते हैं उन अनोखी शख्सियतों की कहानियां, जो अपने दृढ़ संकल्प और हुनर से समाज में नई मिसाल कायम कर रही हैं। चलिए, शुरुआत करते हैं आज के इस शानदार सफर की।

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कर्नाटक के बैंगलोर की मानसा, जो ब्रिक रेड डिज़ाइन स्टूडियो की संस्थापक हैं, ने अपनी क्रिएटिविटी और दृढ़ संकल्प के दम पर आर्किटेक्चर में अपनी एक खास पहचान बनाई है। मानसा ने अपने करियर की शुरुआत एक आर्किटेक्चरल फर्म में काम करके की, जहां उन्होंने प्रैक्टिकल अनुभव हासिल किया। अपने मेहनत और लगन से उन्होंने बड़े आर्किटेक्ट्स के साथ काम करते हुए खुद को इस क्षेत्र में निपुण बनाया। शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी खुद की फर्म की नींव रखी।

मानसा के लिए शुरुआत आसान नहीं थी। उन्होंने छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स से शुरुआत की, लेकिन अपने काम की गुणवत्ता और ग्राहकों की संतुष्टि के चलते उनकी पहचान बढ़ती गई। आज उनकी फर्म बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे अपार्टमेंट्स, विला, रेस्टोरेंट्स और ज्वेलरी शॉप्स का काम कर रही है। मानसा बताती हैं कि हर प्रोजेक्ट में डिजाइन से लेकर लेबर मैनेजमेंट और ऑन-टाइम एक्सेक्यूशन तक, हर कदम एक चुनौती भरा होता है। लेकिन उनकी टीम वर्क और मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।

आने वाले समय में मानसा अपने स्टार्टअप को और ऊंचाइयों तक ले जाना चाहती हैं। उनका उद्देश्य है अपने माता-पिता का नाम रोशन करना और अपने ग्राहकों को बेहतरीन सेवाएं देकर संतुष्टि प्रदान करना। उनका मानना है कि एक अच्छा घर सिर्फ चार दीवारों से नहीं बनता, बल्कि उसमें बसी खुशियों और संतोष से बनता है। उनकी कहानी हर महिला उद्यमी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

दिल्ली की लेखिका और स्टोरीटेलर ऊषा छबड़ा ने शिक्षा और कहानी सुनाने की कला को एक नई दिशा दी है। एक शिक्षिका के रूप में अपना करियर शुरू करने वाली ऊषा ने 24 वर्षों तक डीपीएस में पढ़ाया। उनकी इनोवेटिव टीचिंग मेथड्स और बच्चों के साथ गहरे जुड़ाव ने उनकी पहचान को एक ऑलराउंडर शिक्षक के रूप में स्थापित किया। शिक्षा के दौरान उन्होंने न केवल साइंस और हिंदी पढ़ाया, बल्कि बच्चों को ड्रामा और नई-नई विधाओं के माध्यम से सिखाने में भी महारत हासिल की।

ऊषा की कहानी कहने की यात्रा स्कूल में स्टोरीटेलिंग इवेंट्स से शुरू हुई। जब उन्हें पता चला कि कहानियों के माध्यम से बच्चों को जोड़ने और सिखाने का भी एक प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म है, उन्होंने इसे एक नए करियर के रूप में अपनाया। उन्होंने महसूस किया कि स्टोरीटेलिंग केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हाव-भाव और प्रस्तुतिकरण का बड़ा महत्व है। बच्चों और बड़ों दोनों के साथ कहानियों के माध्यम से जुड़ाव बनाने की उनकी कला ने उन्हें एक प्रसिद्ध स्टोरीटेलर बना दिया।

आज ऊषा अपने सत्रों और वर्कशॉप्स के माध्यम से हजारों बच्चों और बड़ों को प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि कहानियों का हमारे जीवन और मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। चाहे शिक्षा हो या मनोरंजन, कहानी सुनाने की कला जटिल विचारों को सरल और यादगार बनाने में मदद करती है। ऊषा की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा और जुनून से जीवन में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से फाउंडर पूजा बारडे ने ‘रेंट योर रनवे’ के जरिए डिज़ाइनर एथनिक आउटफिट्स को रेंटल प्लेटफॉर्म पर पेश करने की शुरुआत की। पूजा का कहना है कि वे साड़ियां, लहंगे और ब्राइड्समेड्स के लिए खास डिज़ाइन किए गए परिधानों को रेंट पर उपलब्ध कराती हैं। यदि किसी को डिज़ाइन बेहद पसंद आता है, तो उनके लिए कस्टमाइज़ विकल्प भी दिया जाता है। इस आइडिया की शुरुआत पूजा ने 2020 में एक छोटे से इंस्टाग्राम पेज से की थी। सीमित बजट और अपनी जॉब के साथ उन्होंने धीरे-धीरे डिज़ाइनिंग और क्लाइंट बेस बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।

 

2023 में पूजा ने भोपाल में पहला स्टोर खोला, जिसे लोगों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। धीरे-धीरे उनकी रेंटल क्लोदिंग सेक्शन के साथ वेस्टर्न आउटफिट्स का भी विस्तार हुआ। पूजा ने अपने भाई के साथ मिलकर एक नया सेक्शन शुरू किया, जिसमें टॉप्स और ड्रेसेज जैसे वेस्टर्न वियर को सेल किया जाता है। उनका उद्देश्य किफायती कीमत पर डिज़ाइनर कपड़े उपलब्ध कराना है, खासकर उन युवाओं के लिए जो डिज़ाइनर आउटफिट्स पहनना चाहते हैं लेकिन भारी खर्च वहन नहीं कर सकते।

 

पूजा का मानना है कि भोपाल जैसे शहरों में फैशन इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और लोग फैशनेबल दिखने के लिए उत्साहित रहते हैं। हालांकि, ब्राइड्समेड्स और यंग एज ग्राहकों के लिए सीमित विकल्प उपलब्ध हैं। पूजा अब इस प्लेटफॉर्म को पैन-इंडिया स्तर पर विस्तार देना चाहती हैं और एक बड़ा आउटलेट खोलने की योजना बना रही हैं। उनका सपना है कि ‘रेंट योर रनवे’ हर युवा के लिए किफायती डिज़ाइनर आउटफिट्स का पहला विकल्प बने।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से रूबी सिंह ने मिसेज इंडियन ब्यूटी क्वीन 2024 और मिसेज रीगल ब्यूटी 2024 का खिताब जीतकर शहर का नाम रोशन किया है। रूबी ने साझा किया कि यह उनका बचपन का सपना नहीं था, लेकिन जब उन्होंने महिलाओं को क्राउन पहने देखा तो उन्होंने ठान लिया कि उन्हें भी यह मुकाम हासिल करना है। उन्होंने अपनी जर्नी 2023 में शुरू की, जब उन्होंने मिस्टर, मिस और मिसेज मध्य प्रदेश प्रतियोगिता में ऑडिशन दिया। ग्रूमिंग क्लासेज और फैशन इंडस्ट्री के अनुभवी लोगों की मदद से उन्होंने खुद को इस मुकाम तक पहुँचाया।

 

एक साधारण हाउसवाइफ के रूप में अपने जीवन की शुरुआत करने वाली रूबी ने अपनी सोच को बदला और महिलाओं के लिए मंच का हिस्सा बनने का साहस दिखाया। उन्होंने अल्पा रावल जैसे डिज़ाइनर से प्रेरणा लेकर इस दिशा में कदम बढ़ाया। अपनी मेहनत और समर्पण से उन्होंने न केवल दो प्रतिष्ठित खिताब जीते बल्कि यह साबित कर दिया कि अगर परिवार का साथ हो, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

 

रूबी का अगला लक्ष्य मिसेज इंडिया का खिताब जीतना और भविष्य में मिस यूनिवर्स जैसे बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ना है। उनका कहना है कि वे मध्य प्रदेश से ही अपनी तैयारी करना चाहेंगी और राज्य का नाम देशभर में रोशन करना चाहती हैं। उनके लिए परिवार का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है, जो उनके हर कदम पर उनके साथ खड़ा रहा है।

उत्तराखंड के ऋषिकेश से मोनिका खुराना ने अपने स्टार्टअप ‘मम्स बेक हाउस’ के जरिए होम बेकरी को एक नई दिशा दी है। मोनिका ने अपनी यात्रा कोविड-19 के पहले से शुरू की, जब उन्होंने यूट्यूब के जरिए केक और बेकरी आइटम बनाना सीखा। शुरुआत में उन्होंने सिर्फ अपने परिवार और दोस्तों के लिए बनाया, लेकिन उनके काम को पसंद किया गया, और सभी ने उन्हें इसे पेशेवर स्तर पर शुरू करने का सुझाव दिया। ऋषिकेश जैसे छोटे शहर में होम बेकरी का कॉन्सेप्ट नया था, लेकिन मोनिका ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और अपनी मेहनत और लगन से इसे सफल बनाया।

 

मोनिका ने अपनी बेकरी की शुरुआत केक, मफिन्स, और कुकीज से की थी, लेकिन कोविड के समय उनके बिज़नेस को ज़बरदस्त ग्रोथ मिली। बड़े बेकरी ब्रांड्स से सामान लेने से लोग डर रहे थे, और उनकी साफ-सुथरी और हाइजीनिक प्रैक्टिस ने लोगों का विश्वास जीता। समय के साथ, उन्होंने वेडिंग केक्स, हैंपर्स, और नॉन-वेज डिशेज में भी हाथ आजमाया। अब वह छोटे स्तर पर कैटरिंग भी करती हैं और 25-50 लोगों तक के ऑर्डर संभालती हैं। उनका फोकस क्वालिटी बनाए रखने और ग्राहकों को नया अनुभव देने पर है।

 

मोनिका अब अपने बेकिंग बिज़नेस को एक कदम और आगे ले जाना चाहती हैं। उनका सपना है कि वे एक छोटा कैफे खोलें, जिसमें उनके बेकरी आइटम और कैटरिंग सर्विस को एक नए स्तर पर पेश किया जा सके। उनके बच्चे भी इस विचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं। मोनिका का मानना है कि फूड का प्रेजेंटेशन आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण है और वह इसी पर काम कर रही हैं। उनका सफर यह दिखाता है कि अगर जुनून और मेहनत हो, तो छोटे शहरों से भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।

बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।