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चिक्काबल्लापुर में नौकरी और ऋण मेला, 70 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग- एम.एस. रक्षा रामैया

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बैंगलोर के चिकबल्लापुर में 13 जनवरी को होगा आयोजित

बैंगलोर। कर्नाटक प्रदेश के बैंगलोर में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एम.एस.रक्षा रामैया ने कहा कि मकर संक्रांति उत्सव की उपलक्ष में 13 जनवरी को चिक्कबल्लापुर में विशाल नौकरी और ऋण मेले का आयोजन किया गया है। यह युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक ठोस कदम होगा। पत्रकार भवन में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि वृहत रोजगार मेले के साथ-साथ शैक्षणिक ऋण और नव उद्यमों के लिए ऋण की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने कयाक संस्कृति पर जोर दिया है और उम्मीद है कि काम करने वाले हाथों को काम मिलेगा और इसे कारगर करने के प्रयास किए जाएंगे।


नवीनतम 2019 के आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी दर बढ़कर 7.7% हो गई है, जो 45 वर्षों में सबसे अधिक है। नवंबर 2023 में यह दर 10.05% थी. ग्रामीण रोजगार दर 6.2% से बढ़कर 10.82% हो गई है. प्रति वर्ष 2 करोड़ नौकरियाँ देने का भाजपा का वादा वादा ही रह गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भाजपा शासित हरियाणा में बेरोजगारी दर 37.4 प्रतिशत है, जिससे भारत में बेरोजगारी की समस्या अधिक हो गई है।

मार्च 2023 में कर्नाटक की बेरोजगारी दर 2.31% थी। कर्नाटक की जीडीपी में चिक्काबल्लापुर जिले का योगदान लगभग 1.1% (3,525 करोड़) है। चिक्काबल्लापुर के कृषि और संबद्ध क्षेत्र (पशुपालन, वन) के लिए राज्य का योगदान 2.7% (1156 करोड़ रुपये), उद्योग (उत्पादन, निर्माण, खनन) का योगदान 1% (713 करोड़ रुपये) है। यह जिला डेयरी क्रांति और फूलों की खेती सहित कई क्षेत्रों में राज्य के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर चिक्कबल्लापुर को विकास के पथ पर ले जाना है।

रोजगार मेले में 70 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं और 5 प्रमुख बैंक ऋण सुविधाएं दे रहे हैं। साक्षात्कार की दक्षता, कौशल, शिक्षा के आधार पर 16,000 रुपये से 1 लाख रुपये वेतन की नौकरियां दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। नवीन उद्यमों के विकास, शैक्षिक ऋण पर भी ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि रोजगार मेले के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, होंडा मोटर्स, विवा मोटर्स, अपोलो होमकेयर, रिलायंस रिटेल, मोटोरोला, जस्ट डायल लिमिटेड, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस, विस्ट्रॉन इन्फोकॉम, रॉयल मार्ट, टाटा विस्ट्रॉन, बिग बास्केट जैसी प्रमुख कंपनियां चिक्काबल्लापुर, डोड्डाबल्लापुर और देवेनहल्ली के आसपास नौकरियां दिलाएंगी।

कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, मुथूट हाउसिंग लोन फाइनेंशियल सर्विसेज, फेडरल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडसइंड बैंक ऋण सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।