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खरगे का आरोप- बोले- लोगों को गुमराह कर रही भाजपा

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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए बिंदुओं को महत्व दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसी संपत्तियों पर विवाद पैदा करने के लिए जानबूझकर ‘वक्फ बाय यूजर’ का मुद्दा उठाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अपने नेताओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाई से नहीं घबराएगी और वह इस अधिनियम पर भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ाई जीतेगी। लोकसभा चुनाव से पहले हमारे खाते बंद कर दिए गए थे, फिर भी जनता ने संसद में हमारी ताकत दोगुनी कर दी। हमारी लड़ाई कमजोर नहीं हुई और अभी खत्म भी नहीं हुई है।

कांग्रेस ने शनिवार को ”संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने” के लिए बड़े पैमाने पर राष्ट्रव्यापी ”संविधान बचाओ” अभियान शुरू करने की घोषणा की। यह अभियान चार चरणों में चलाया जाएगा – 25 से 30 अप्रैल तक राज्य स्तरीय रैलियां, तीन से 10 मई तक जिला स्तरीय लामबंदी, 11 से 17 मई तक विधानसभा क्षेत्र स्तर पर अभियान, तथा 20 से 30 मई तक घर-घर जाकर जागरूकता अभियान, ताकि संवैधानिक मुद्दों पर नागरिकों से सीधे संपर्क किया जा सके।

बहरहाल, यहां महासचिव और प्रभारियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि पार्टी के पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम ईडी के आरोपपत्र में है और दिल्ली, लखनऊ और मुंबई में नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को ”प्रतिशोध की भावना” से जब्त किया गया है।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”इस समय सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि हम यह लड़ाई भी जीतेंगे। मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए ¨बदुओं को महत्व दिया है।” उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार पर वक्फ के मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

खरगे ने आरोप लगाया, ”खासकर ‘वक्फ बाय यूजर’ का मुद्दा सरकार ने जानबूझकर उठाया है, ताकि वक्फ संपत्तियों को विवाद में डाला जा सके।” उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की कार्रवाई से कांग्रेस नहीं डरेगी।

उन्होंने कहा, ”आपने देखा होगा कि कैसे एक बड़ी साजिश के तहत कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम नेशनल हेराल्ड मामले में आरोपपत्र में डाला गया है। वे चाहे जिसका भी नाम डालें, हम डरने वाले नहीं हैं। अभी दो या तीन दिन पहले ही दिल्ली, लखनऊ और मुंबई में नेशनल हेराल्ड की संपत्तियां जब्त की गई थीं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह सब बदले की भावना से किया जा रहा है।”

खरगे ने ‘यंग इंडियन’ को ‘नाट फार प्रोफिट’ कंपनी बताते हुए कहा कि इसका मतलब यह है कि कोई भी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के शेयर, संपत्ति या लाभ को न तो ले सकता है और न ही हस्तांतरित कर सकता है।

उन्होंने कहा, ‘भाजपा के लोग झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। हमें जनता को सच बताना होगा।’ ईडी ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ यहां एक विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें उन पर 988 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग का आरोप लगाया गया है।

आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने अपनी सार्वजनिक कंपनी एजेएल की 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ‘हड़पने’ के लिए ‘आपराधिक साजिश’ की। इसमें 99 प्रतिशत शेयर महज 50 लाख रुपये में अपनी निजी कंपनी यंग इंडियन को हस्तांतरित कर दिए गए जिसमें सोनिया और राहुल गांधी सर्वाधिक शेयरधारक हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।