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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जाएंगे अमेरिका

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नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अगले सप्ताह अमेरिका जाएंगे। इस दौरान वे ब्राउन यूनिवर्सिटी में भाषण देंगे। वे संकाय सदस्यों और छात्रों से बातचीत भी करेंगे। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 21 और 22 अप्रैल को अमेरिका के रोड आइलैंड में ब्राउन यूनिवर्सिटी जाएंगे। वहां वे भाषण देंगे। विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और छात्रों से कई मुद्दों पर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि रोड आइलैंड जाने से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता एनआरआई समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (आईओसी) के पदाधिकारियों और सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।

इससे पहले पिछले साल सितंबर में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अमेरिका की तीन दिवसीय यात्रा की थी। तब उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षा समुदाय से जुड़े लोगों से मुलाकात की थी। उनसे बातचीत की थी। उन्होंने कुछ तकनीकी विशेषज्ञों से भी मुलाकात की थी और डलास क्षेत्र के नेताओं के साथ रात्रिभोज किया था। राहुल ने वॉशिंगटन डीसी में थिंक टैंक, नेशनल प्रेस क्लब और अन्य लोगों के साथ बातचीत भी की थी।

इससे पहले राहुल गांधी ने लोको पायलटों की कार्य स्थितियों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमानवीय परिस्थितियों में काम करना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि ट्रेनों से यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। राहुल ने ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें दावा किया गया था कि रेलवे ने अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया। रिपोर्ट में महिला कर्मचारियों के हवाले से कहा गया कि उन्हें शौचालय की सुविधा के बिना आठ घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है।

राहुल ने कहा, ‘पिछले साल जब मैं रेलवे लोको पायलटों से मिला, तो मैं उनकी स्थिति जानकर बहुत चिंतित था। 14 घंटे की शिफ्ट, लगातार रात की ड्यूटी, पर्याप्त आराम नहीं, भोजन के लिए अवकाश नहीं और शौचालय की सुविधा नहीं। दुर्घटनाओं के बाद रेलवे इसे ‘मानवीय भूल’ कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन यह नहीं बताता कि कर्मचारियों को अमानवीय तरीके से कैसे काम करना पड़ता है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मूल मांगें काम के घंटे तय करना और बेहतर माहौल देना है, लेकिन सरकार ने दिखावे के लिए एक समिति बनाई और समाधान निकालने का कोई इरादा नहीं है। राहुल ने कहा, ‘अब भोजन और शौचालय ब्रेक जैसी मांगों को भी यह कहकर खारिज कर दिया गया है कि यह व्यावहारिक नहीं है। यह न केवल लोको पायलटों के साथ अन्याय है, बल्कि ट्रेनों से यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।’ उन्होंने कहा कि यह न्याय की लड़ाई है और हम इसमें लोको पायलटों के साथ हैं- जब तक सरकार बहरी रहेगी, हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।