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14 मार्च 2025 होली पर लगने जा रहा है चंद्र ग्रहण, जानें राशिनुसार इसका प्रभाव

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नई दिल्ली। साल का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025 होली पर लगने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी कोई ग्रहण लगता है तो उसका अगले 15 दिन से लेकर एक महीने तक देश-दुनिया पर गहरा प्रभाव पड़ता है। होली के दिन चंद्र ग्रहण का समय सुबह 09 बजकर 29 मिनट से दोपहर 03 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। जिसके कारण देश में सूतक काल के नियम मान्य नहीं होंगे। जानें साल के पहले चंद्र ग्रहण का मेष से लेकर मीन राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए ग्रहण शुभ नहीं है। धन हानि हो सकती है। पैसों से जुड़ा कोई भी रिस्क न लें। चोट-चपेट लग सकती है। जीवनसाथी के साथ पर नजर रखें।
वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को करियर में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। सेहत को लेकर सतर्क रहें। महत्वपूर्ण फैसलों से बचें।

मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए चंद्र ग्रहण का प्रभाव शुभ है। आपके रुके हुए काम पूरे होंगे। नौकरी में स्थान परिवर्तन हो सकता है। नौकरी में प्रमोशन आदि मिल सकता है।

कर्क राशि- कर्क राशि वालों को माता की सेहत का ध्यान रखना चाहिए। जीवनसाथी की सेहत पर भी नजर रखनी चाहिए।

सिंह राशि- सिंह राशि वालों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। परिवार में कलह के संकेत हैं, इसलिए बहुत बचकर पार करें। धन हानि के संकेत हैं।

कन्या राशि- कन्या राशि वालों को करियर में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यात्रा में कष्ट हो सकता है। पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।

तुला राशि- तुला राशि वालों के महत्वपूर्ण काम बन सकते हैं। धन से जुड़ी परेशानियों का अंत होगा। शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे।

वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों को महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता हासिल होगी। अटके हुए कार्य संपन्न होंगे। नौकरी में मनचाहा ट्रांसफर मिल सकता है।

धनु राशि- धनु राशि वालों को चोट-चपेट से सतर्क रहना चाहिए। काम पर दबाव बन सकता है। मानसिक परेशानी हो सकती है। बड़े-बुजुर्गों का ध्यान रखें।

मकर राशि- मकर राशि वालों को एक महीने तक सेहत का ध्यान रखना चाहिए। मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखें। महत्वपूर्ण फैसला फिलहाल के लिए टाल दें। वाद-विवाद से बचें।

कुंभ राशि- वैवाहिक जीवन में परेशानी हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। किसी भी बड़े फैसले को लेने में सतर्कता बरतें।

मीन राशि- मीन राशि वालों को धन व संपत्ति से जुड़ी परेशानी खत्म होंगी। नौकरी पेशा में सकारात्मक मोड़ आ सकता है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।