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पीसीएस परीक्षा की नई तारीख का एलान, इस दिन होगा एग्जाम

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा की नई तारीख का एलान कर दिया है। यह परीक्षा 22 दिसंबर को एक ही दिन में आयोजित होगी। जानकारी के अनुसार, यह परीक्षा 22 दिसंबर को दो शिफ्ट में होगी। पहली शिफ्ट में सामान्य अध्ययन, दूसरी में सी सैट का पेपर होगा।

इस परीक्षा का आयोजन सात और आठ दिसंबर को होना था, लेकिन छात्रों के आंदोलन के बाद आयोग ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया था। इसके बाद एक दिन में ही परीक्षा कराने पर सहमति बनी थी। अब नई तारीख की घोषणा की गई है। दो पालियों में होने वाली परीक्षा पहली पाली में सुबह 9:30 बजे से 11:30 तक होगी, जबकि दोपहर 2:30 बजे से 4:30 तक दूसरी पाली में होगी।

यूपीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in. पर जारी नोटिस के अनुसार, ‘सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2024 अब एक दिन में 22 दिसंबर 2024 को दो सत्रों में आयोजित होगी। पहले यह परीक्षा दो दिन में सात और आठ दिसंबर 2024 को होनी थी। परीक्षा में 10 लाख से अधिक (10,76,004) अभ्यर्थियों ने परीक्षा देंगे।

आपको बता दें कि प्रयागराज में चार दिनों से आंदोलन पर बैठे छात्रों का बृहस्पतिवार को पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ गुस्सा भड़का तो उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) को पीछे हटना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयोग के सचिव को आंदोलनकारी छात्रों के बीच आकर घोषणा करनी पड़ी कि पीसीएस परीक्षा पूर्व की भांति एक दिन में कराई जाएगी। वहीं, आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए समिति गठित कर दी गई है।
भारी शोर-शराबे के बीच सचिव की इस घोषणा से कई छात्रों के चेहरे पर खुशी झलक पड़ी तो ज्यादातर इससे असंतुष्ट दिखे। छात्र अड़े हैं कि आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा भी पूर्व की भांति एक ही दिन में कराए जाने का नोटिस जारी किया जाए। वहीं, सचिव अशोक कुमार ने छात्रों को समझाया कि एक दिन की परीक्षा कराने पर विचार करने के उद्देश्य से ही कमेटी का गठन किया गया है।

फिलहाल, आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों और आयोग के बीच गतिरोध बना हुआ है। आयोग ने पीसीएस व आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा की तिथि को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इससे पहले पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा सात व आठ दिसंबर और आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 22 व 23 दिसंबर को प्रस्तावित थी।

आयोग के अनुसचिव ओंकार नाथ सिंह के अनुसार आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2023 के तहत चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, गुणधर्मिता व शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाने के उद्देश्य से सभी तथ्यों का समेकित अनुसंधान एवं विश्लेषण के लिए आयोग ने समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पहलुओं पर विचार कर अतिशीघ्र अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।