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वायनाड में प्रियंका को बड़ी बढ़त

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महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों के साथ ही आज 13 राज्यों की 46 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा सीटों वायनाड और नांदेड़ का चुनाव परिणाम भी आएगा। वायनाड लोकसभा सीट से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी चुनावी मैदान में हैं। वहीं भाजपा ने उनके विरोध में नव्या हरिदास को चुनावी मैदान में उतारा है। मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों नेताओं के बीच देखा जा रहा है। वहीं, एक और लोकसभा सीट नांदेड़ का भी आज चुनाव परिणाम आएगा। नांदेड़ में कांग्रेस ने रवींद्र चह्वाण को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने उनके विरोध में डॉ. संतुक हंबार्डे को मैदान में उतारा है।

वायनाड में प्रियंका गांधी आगे
राहुल गांधी द्वारा वायनाड सीट को खाली करने के बाद उनकी बहन प्रियंका गांधी चुनावी मैदान में हैं। यहां से प्रियंका ने लाखों की बढ़त हासिल कर ली है। अभी तक की गिनती के मुताबिक, प्रियंका गांधी को 253940 वोट मिले हैं। वो 167539 वोटों से आगे हैं। वहीं दूसरे नंबर पर सीपीआई के उम्मीदवार सत्यन मोकरी हैं। उन्हें 86401 वोट मिले हैं। बात अगर भाजपा उम्मीदवार नव्या हरिदास की करें तो उन्हें मात्र 48122 वोट मिले हैं। वो 205818 वोटों से पीछे हैं।

दक्षिण भारत की वायनाड लोकसभा सीट पर गांधी परिवार की सियासी किस्मत दांव पर है। राहुल गांधी के वायनाड सीट छोड़ने के बाद उनकी बहन प्रियंका गांधी यहां चुनावी मैदान में उतरी हैं। करीब साढ़े तीन दशक का खुद का राजनीतिक अनुभव बताने वाली प्रियंका पहली बार चुनावी राजनीति में दाखिल हुई हैं। प्रियंका से पहले उनकी दादी इंदिरा, मां सोनिया और भाई राहुल भी दक्षिण भारत से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
नांदेड़ में रविंद्र चव्हाण और संतुत राव हंबरडे के बीच मुकाबला
नांदेड़ में कांग्रेस के रविंद्र चव्हाण और भाजपा के संतुत राव हंबरडे के बीच मुख्य मुकाबला है। नांदेड़ लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने बढ़त बना रखी है। यहां कांग्रेस के रवींद्र वसंतराव चाह्वाण ने 538 वोटो की बढ़त बना रखी है। अब तक की गिनती के मुताबिक, रवींद्र वसंतराव चाह्वाण को 52862 वोट मिले हैं वहीं, भाजपा उम्मीदवार संतुत राव हंबरडे को 52324 वोट मिले हैं।

इसी साल हुए लोकसभा चुनावों में यहां से कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। हालांकि, सांसद वसंत राव चव्हाण का निधन हो जाने के कारण यहां पर लोकसभा उपचुनाव हुआ है। लोकसभा उपचुनाव में पिछली बार जीते वसंत राव चव्हाण के बेटे रविंद्र चव्हाण कांग्रेस से हैं, तो भाजपा ने संतुत राव हंबरडे को मैदान में उतारा था।

लोकसभा की किन सीटों पर आएंगे परिणाम
वायनाड, केरल: देश भर में जिन लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुआ है उनमें सबसे चर्चित वायनाड सीट है। वायनाड सीट राहुल गांधी के इस्तीफे से रिक्त हुई है जो 2024 के लोकसभा चुनाव में वायनाड के साथ-साथ रायबरेली सीट से भी जीते थे। हालांकि, राहुल ने रायबरेली सीट को अपने पास रखा और वायनाड सीट से इस्तीफा दे दिया।

नांदेड़, महाराष्ट्र: देश में जिन लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं उनमें दूसरी सीट नांदेड़ है। महाराष्ट्र की यह सीट कांग्रेस सांसद वसंतराव चव्हाण के निधन से रिक्त हुई है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।