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पाकिस्तान और चीन के पेड एजेंट हैं राहुल गांधी, भाजपा बोली- ऑपरेशन सिंदूर और सेना का मजाक उड़ाया

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नई दिल्ली। भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि उसके नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए बयान से संदेह होता है कि वह चीन और पाकिस्तान के ”पेड एजेंट” हैं।

भाजपा की यह टिप्पणी तब आई है जब राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में पार्टी सम्मेलन के दौरान आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन के बाद आत्मसमर्पण कर दिया। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने टिप्पणियों के जरिये ऑपरेशन सिंदूर, सशस्त्र बलों और देश का अपमान किया है।

उन्होंने कहा, ”राहुल गांधी जिस प्रकार की भाषा का उपयोग कर रहे हैं, जिस प्रकार के सवाल बार-बार पूछ रहे हैं, मुझे पूरा संदेह है कि वह चीन या पाकिस्तान के पेड एजेंट हैं। यह वही राहुल गांधी और उनका पूरा परिवार था जो डोकलाम में भारत-चीन गतिरोध के दौरान चीन के लिए जासूसी करते पकड़े गए थे।”पात्रा ने कहा कि कोई भी सभ्य राजनीतिज्ञ या विपक्ष का नेता अपने देश के बारे में बात करते समय ”आत्मसमर्पण” जैसे शब्द का उपयोग नहीं करेगा। जो नेता अपने मातृभूमि के लिए ऐसे शब्द का उपयोग करता है, वह राजनीति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।

पात्रा ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के अंदर नौ आतंकी लांचपैड और 11 एयर बेस को नष्ट करके लिया गया था। इसके बावजूद राहुल गांधी ने भारतवर्ष के लिए ‘आत्मसमर्पण’ शब्द का उपयोग किया और ऑपरेशन सिंदूर का मजाक उड़ाया। भारत कभी आत्मसमर्पण नहीं करता, भारतवर्ष आतंकवाद के सामने कभी नहीं झुका।
उन्होंने दावा किया कि मोदी के 2014 में सत्ता में आने के साथ ही नए ”भारत” का उदय हुआ। पात्रा ने कहा, ”वह अलग समय था जब आप (संप्रग सरकार) पाकिस्तान के साथ डोजियर-डोजियर खेलते रहे.. अब कोई डोजियर नहीं, केवल डोज दिया जाता है।”

भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर पाकिस्तानी प्रचार नेता होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ”राहुल गांधी उस पर विश्वास तो करें जो डीजीएमओ और विदेश मंत्रालय ने कहा है। अगर उन पर नहीं, तो कम से कम शशि थरूर, मनीष तिवारी और सलमान खुर्शीद पर विश्वास करें। उन्होंने कहा है कि कोई मध्यस्थता नहीं हुई, भारत ने पाकिस्तान को कॉल नहीं किया, उनके डीजीएमओ ने भारत से संपर्क किया था।”

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर संसद के विशेष सत्र को लेकर जनता को गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष उस समय की चर्चा से बच रहा है जब संविधान को तोड़ा मरोड़ा गया था।
मेघवाल ने कहा-, ”यह संसद सत्र का विषय नहीं है।” उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानना चाहिए कि संविधान को किसने तोड़ा और मरोड़ा। उन्होंने बताया कि कैसे एक संशोधन लाया गया था ताकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को पलटा जा सके।

कांग्रेस सहित कई पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सरकार आपातकाल की वर्षगांठ पर संसद का दो दिवसीय सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है। केंद्र सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।