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राहुल गांधी का गुजरात दौरा आज से, कांग्रेस करेगी चुनावी तैयारियों पर मंथन

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी आज यानी सात मार्च से गुजरात दौरे पर रहेंगे। दो दिवसीय दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य आ रहे कांग्रेस नेता गुजरात में कांग्रेस समिति की बैठक में भाग लेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए राज्य के जिला और राज्य स्तरीय पार्टी कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।

राहुल के दौरे का मकसद
राहुल से पहले कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल अहमदाबाद पहुंचे। उन्होंने राहुल के दौरे के संबंध में कहा कि गुजरात में राहुल गांधी जिला कांग्रेस समितियों (डीसीसी) के अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्षों और वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने बताया कि राहुल कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी बातचीत करेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की राय पर विचार के बाद कांग्रेस गुजरात विधानसभा चुनाव जीतने के मिशन के साथ आगे बढ़ रही है।

139 साल के इतिहास में केवल तीसरा मौका
गुजरात के अहमदाबाद में अप्रैल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। 139 साल पुरानी पार्टी का गुजरात में यह सम्मेलन तीसरी बार होगा। इससे पहले 1936 और 1961 में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। साल 1961 के 64 साल बाद यह सम्मेलन गुजरात में होगा।

कांग्रेस और गुजरात का खास नाता है
गुजरात में कांग्रेस का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन 1938 में बारदोली के हरिपुरा में हुआ था। यह सम्मेलन सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में हुआ था। यह सम्मेलन बारदोली सत्याग्रह की 10वीं वर्षगांठ पर हुआ था। इस सम्मेलन में सुभाष चंद्र बोस को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष चुना गया था। इसमें पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी। साथ ही सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता मिलने के बाद सरकार चलाने की रूपरेखा बताई थी। उन्होंने योजना आयोग बनाने और पंचवर्षीय योजना बनाने का सुझाव दिया था। उनके सुझाव को 12 साल बाद प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लागू किया था।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।