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दिल्ली में दलित वोटों पर दंगल, BJP ने केजरीवाल का आरक्षण पर वीडियो किया जारी

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नई दिल्ली। दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोटर्स को साधने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच घमासान छिड़ गया है। एक तरफ जहां ‘आप’ ने बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाकर अभियान छेड़ दिया है तो दूसरी तरफ अब भाजपा आरक्षण के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को घेरने में जुटी हुई है। भाजपा ने आतिशी के बाद अब अरविंद केरीवाल का आरक्षण पर पुराना बयान दिखाते हुए कहा है कि उनकी यही असलियत है।

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने एक वीडियो क्लिप के जरिए अरविंद केजरीवाल पर पलटवार किया। गुप्ता ने एक्स पर लिखा, ‘बाबा साहेब आंबेडकर पर आज केजरीवाल छाती पीट रहे हैं। उन्हीं केजरीवाल की असलियत जरा देखिए। कभी ये खुद आरक्षण हटाने की बात करते थे। आज यही पलटूबाज केजरीवाल आंबेडकर जी पर घटिया राजनीति कर रहे हैं।’ विजेंद्र गुप्ता ने जो वीडियो एक्स पर शेयर किया है उसमें केजरीवाल आरक्षण पर टिप्पणी करते हुए सुनाई दे रहे हैं।

42 सेकेंड के इस वीडियो में अरविंद केजरीवाल कहते हैं, ‘हमारा यह भी मानना है कि यदि एक बार एक व्यक्ति को आरक्षण का फायदा मिल जाए या वो व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत है तो रिजर्वेशन उसको नहीं मिलना चाहिए, रिजर्वेशन उसी समाज के किसी दूसरे व्यक्ति को मिलना चाहिए ताकि रिजर्वेशन का फायदा सबको मिल सके। लेकिन हमारा यह भी मानना है कि हमारे देश में 20 करोड़ अनुसूचित जाति के लोग हैं। साल में दो लाख नौकरियां निकलती हैं जिनमें रिजर्वेशन का फायदा मिलता है। केवल रिजर्वेशन देकर हम 20 करोड़ लोगों को मेन स्ट्रीम में लाएंगे पता नहीं कितनी सदियां लग जाएंगी। 100 साल भी कम पड़ेंगे।’ लाइव हिन्दुस्तान इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो ‘आप’ के शुरुआती दिनों का है। केजरीवाल आम आदमी पार्टी की टोपी पहने हुए नजर आ रहे हैं। विजेंद्र गुप्ता ने इससे पहले गुरुवार को आतिशी का भी 2014 का एक ट्वीट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने ऐसी ही बात लिखी थी।

दरअसल, आप और भाजपा के बीच दलित वोटर्स को साधने की होड़ मची है। 70 सदस्यीय विधानसभा में 12 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटे हैं। ‘आप’ ने पिछले दो विधानसभा चुनाव में इन सभी सीटों पर जीत हासिल की तो हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन पर अच्छा प्रदर्शन किया था। अब आगामी विधानसभा चुनाव में कौन आगे रहेगा यह तो बाद में पता चलेगा। फिलहाल दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।