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घुसपैठियों को नागरिक बनाने में लगे रहे RJD कांग्रेस

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भागलपुर। PM Modi Bihar Rally गुरुवार को अररिया की सभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि राजद और कांग्रेस को गलती से भी जहां मौका मिला, ये घुसपैठियों को पिछले दरवाजे से भारत का नागरिक बनाने में लगे रहे। ये घुसपैठिये आपके खेतों पर कब्जा कर रहे हैं। आपके बच्चों के हक छीन रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, इन घुसपैठियों का हिसाब एनडीए की सरकार ही कर सकती है। राजद और कांग्रेस को देश की आस्था से कोई मतलब नहीं है। घुसपैठियों के दबाव और वोटबैंक के चलते ये प्रभु श्रीराम से भी नफरत करते हैं। कांग्रेस के नामदार बिहार आकर छठ पूजा को ड्रामा और नौटंकी बताते हैं। महाकुंभ स्नान का भी मजाक उड़ाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, राम मंदिर की आलाचना करते नहीं थकते हैं। बिहार में 15 वर्षों तक जंगलराज के राज में विकास नील बटे सन्नाटा रहा। आइआइटी, आइआइएम और नेशनल ला यूनिवर्सिटी कुछ भी नहीं खोले गए। राजद के नेता पूरी एक पीढ़ी का भविष्य खा गए। एनडीए की सरकार में नीतीश कुमार ने बहुत मेहनत से बिहार को जंगलराज से निकाला।

पीएम ने कहा कि 2014 में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद पटना में आइआइटी और एम्स, भागलपुर में ट्रिपल आइटी, नेशनल ला यूनिवर्सिटी, चार सेंट्रल यूनिवर्सिटी खोले गए। गांगा पर चार बड़े पुल बनाए गए। बिहार का विकास एनडीए ही कर सकता है। मोदी की सभा डेढ़ बजे भागलपुर में होनी है।

अररिया के फारबिसगंज की चुनावी सभा में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार में सरकार बनाने के नाम पर आपको लूट गया। मोदी की गारंटी है, नौजवान साथियों आपका सपना ही मोदी का संकल्प है। राहुल तेजस्वी अपने आप को शहंशाह मानते हैं। मेरा माई बाप आप जनता जनार्दन है। 140 करोड़ देशवासी मेरा परिवार है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आपका वोट की बहुत बड़ी ताकत होती है। इसको बताना चाहता हूं आपके दादा-दादी नाना नानी ने बिहार को सामाजिक न्याय की भूमि बनाया था।यह जंगल राज वालों ने उसे बर्बाद कर दिया।

यहां बिहार में एक सबसे बड़ी चुनौती घुसपैठियों की है।एनडीए पूरी ईमानदारी से घुसपतियों की पहचान कर रही है और इसे देश से निकलने का काम करेगी।इसके लिए आपका वोट की जरूरत है। यह राजद कांग्रेस वाले घुसपैठियों को बचाने में जुटे हुए हैं।लोगों को गुमराह करने के लिए राजनीतिक यात्रा निकालते हैं। उन्होंने लोगों से सवालिया लहजे में पूछा कि क्या बिहार से घुसपैठियों को बाहर निकलना चाहिए या नहीं। राजद कांग्रेस वालों को जब भी मौका मिला है यह घुसपैठियों को पिछले दरवाजे से भारत का नागरिक बनाने में लग रहे।यह आपके खेतों पर कब्जा करना चाहते हैं।आपका एक वोट ही इन घुसपठियो को यहां से बाहर निकल सकता है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।