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शनि कुंडली में हमेशा अपनी स्थिति के अनुसार फल देते हैं। यह एक न्याय प्रिय और कर्म प्रधान ग्रह – शालू

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नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों का अपना महत्व बताया गया है, नव ग्रहों में शनि ग्रह एक महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। ये ग्रह व्यक्ति के जीवन में सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है। ये ग्रह सबसे धीमी चाल से चलने वाला ग्रह होता है जिसके कारण इसका शुभ-अशुभ प्रभाव सबसे ज्यादा समय तक रहता है। न्यूमेरोलॉजिस्ट और टैरो कार्ड रीडर शालू शर्मा ने शनि ग्रह संबंधी कुछ विशेष जानकारी और उपाय साझा किए।
शालू शर्मा ने बताया शनि ग्रह के बारे में बहुत सारी भ्रांतियां हैं की शनि कष्टकारी होते हैं। लेकिन ऐसा आवश्यक नहीं हैंl शनि कुंडली में हमेशा अपनी स्थिति के अनुसार फल देते है l यह एक न्याय प्रिय और कर्म प्रधान ग्रह हैl
चाहे शनि की साढ़ेसाती हो या ढैया हो या दशा चल रही हो यह हमेशा अनिष्ट करने वाला नहीं होता और किसी भी जातक की कुण्डली में कुछ भी बोलने से पहले शनि के साथ बाकी ग्रहों की स्थिति देखना बहुत जरूरी हैं
यह जरूर है कि शनि एक पापी ग्रह है और संघर्ष जरूर देते है लेकिन संघर्ष के उपरान्त फल हमेशा अच्छा रहता हैl शनि की ढैया या साढ़ेसाती में हो सकता है व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़े जैसे बच्चे का मन उचाट हो जाना, मनवांछित फल प्राप्त न होने से बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाना, सफलता नहीं मिल पाना लेकिन यह संघर्ष नहीं यह अड़चन है यह बात समझनी होगीl
ऐसी स्थिति कभी हो तो दान पूजन, मंत्र जाप, औषधि स्नान से ग्रह की शांति हो जाती हैl शनि एक न्यायप्रिय देवता है यह कभी भी आपका बुरा नही होने देंगेl हो सकता है की मानसिक कष्ट, अशांति या ग्रह क्लेश हो किन्तु उपरोक्त सभी चीजों पर विचार करने के बाद हमें अपना मन शांत रखना आवश्यक होता हैl
शनि कि विपरीत परिस्थितियों में कुछ उपाय
शनि ग्रह का मंत्र उच्चारण करना और शनि का यंत्र धारण करना सबसे अच्छा रहेगा
शनि का पूजन हमेशा सूर्यास्त के बाद ही होना चाहिए
शनि स्त्रोत और शनि चालीसा लाभप्रद रहेगा
शनि वासरी अमावस्या में शनि का उपाय कर सकते है
शनिवार के दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें या सुने
श्रवण नक्षत्र में शनिवार के दिन काले रंग के धागे में शमी का अभिमंत्रित जड़ धारण करने से शनि के दुष्प्रभावों से शांति मिलती है
पक्षियों को दाना डालना, अपनी छाया देखकर तेल दान करना और महामृत्युंजय का उच्चारण निष्ठा पूर्वक किया जाए तो शनि हमें काफी मदद करते हैं
शनि की किसी भी समस्या के लिए शनि के वैदिक मंत्र का जाप करना सहायक होता है।

यह आंकलन न्यूमेरोलॉजिस्ट शालू शर्मा द्वारा ज्योतिषीय गणना के आधार पर किया गया है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।