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पूर्व गृहमंत्री पर गंभीर आरोप, मिश्रा पर राज्य संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप

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भोपाल। कांग्रेस नेता एवं दतिया विधायक राजेंद्र भारती ने सोमवार को पीसीसी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए है। भारती ने मिश्रा पर भ्रष्टाचार, आपराधिक गतिविधियों और अनैतिता के आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ विस्तृत जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिश्रा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई मामलों में राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग कर जनता को धोखा दिया है।

परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें
भारती ने हाल ही में चर्चा में आए परिवहन विभाग के भ्रष्ट आरक्षक सौरभ शर्मा का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया, ष्सौरभ शर्मा को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने और उसके बाद दतिया की चूरूला बेरियर पर पोस्टिंग कराने में नरोत्तम मिश्रा की प्रत्यक्ष भूमिका रही है। यही से मिश्रा ने शर्मा के द्वारा करोड़ो रूपये की बसूली एवं लूट शुरू कराई। यह मामला केवल एक उदाहरण है, मिश्रा के ऐसे दर्जनों भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंध हैं।ष् भारती ने इस मामले को प्रदेश में बढ़ते राजनीतिक संरक्षण के एक उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, की जब भ्रष्ट मामूली आरक्षक के पास इतना पैसा और संपत्ति है। तो सोचिए इनकी पोस्टिंग और संरक्षण देने वाले नरोत्तम मिश्रा के पास कितनी काली कमाई होगी, इसकी जांच होनी चाहिए।

ई-टेंडर और व्यापम घोटाले में मिश्रा की भूमिका
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नरोत्तम मिश्रा के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए दतिया सहित प्रदेशभर में स्वास्थ्य विभाग में फर्जी भर्तियां और ट्रांसफर किये गए तथा उन में से अधिकांश फर्जी कर्मचारियों का वेतन यूनिक कोड से कराया गया। भारती ने इसी प्रकार, भ्रष्टाचार और ई-टेंडर घोटाले में नरोत्तम मिश्रा की कथित संलिप्तता का आरोप लगाया। भारती ने कहा, व्यापम घोटाले, जिसने प्रदेश की छवि को धूमिल किया, उसमें भी नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका रही है। मिश्रा ने इन घोटालों के माध्यम से न केवल धन अर्जित किया बल्कि प्रदेश के युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया। इससे पहले आयकर विभाग की टीम ने मुकेश शर्मा के छापा लगा जिसमें बरामद दस्तावेजों से पता लगा कि दो अलग-अलग कंपनियों से नरोत्तम मिश्रा ने 27 करोड़ रुपये के लगभग रिश्वत ली। और उस पैसे से भोपाल में जमीन खरीदी। और उस पैसे का ट्रांजेक्शन डबरा, भितरवार से फर्जी किसानों के नाम से डाला गया था। जो रिपोर्ट में उजागर है।

तीनों कंपनी में काली कमाई को किया सफेद
भारती ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा के छोटे पुत्र अंशुमान मिश्रा की कंपनी डाबर अल्कोब्रू प्राइवेट लिमिटेड, गैलेक्टिक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, संसाई प्रोप्राइटर्स एंड होटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से तीनों कंपनी में काली कमाई को सफेद किया जा रहा है। इसके अलावा डाबर में नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार ने नवग्रह मंदिर बनाकर एक निजी ट्रस्ट बनाया है। जिसमें अकूत काली कमाई को सफेद करने का भगवान की आड़ में खेल खेला जा रहा है। डबरा शुगर फेक्ट्री जिसकी जमीन सरकारी हो चुकी है। उस पर नरोत्तम ने अवैध कब्जा बना रखा है। इसी तरह से दतिया में नरोत्तम के परिवारजनों ने दिनारा रोड पर वन विभाग की जमीन पर, कुशवाहा की और शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा कर भवन बना लिया है।

मिश्रा के निजी जीवन पर गंभीर सवाल
राजेंद्र भारती ने डबरा निवासी कोमल अग्रवाल का मामला उठाते हुए नरोत्तम मिश्रा के निजी जीवन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने हाथ में एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि मिश्रा यह स्पष्ट करें कि कोमल अग्रवाल से उनके क्या संबंध थे और उनकी संदिग्ध मौत का कारण क्या है। यदि यह संबंध सामान्य था, तो उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साध रखी है? भारती ने कहा कि एक जगत विजन नामक पत्रिका में इस मामले की तस्वीर सहित रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, लेकिन मिश्रा ने इस पर कभी सफाई नहीं दी। पता नहीं नरोत्तम मिश्रा ने कितने अन्य का जीवन बर्बाद किया है।

संपत्ति और परिवार पर लगाए गंभीर आरोप
राजेंद्र भारती ने आरोप लगाया कि नरोत्तम मिश्रा ने चिटफंड कंपनियों, एवं सहारा कम्पनी जिसमें लोगों का अरबो रुपये लगा हुआ है। सुब्रत राय सहारा से धोखाधड़ी कर उनकी जमीनी फर्जी नाम से खरीदी गई। जाली नोटों और अन्य भ्रष्ट तरीकों से बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने कहा, ष्पूर्व गृह मंत्री के पास अकूत संपत्ति है, जिसकी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने अपने अपात्र बड़े भाई आनंद मिश्रा को जीवाजी विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार बनवाया, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।

मुख्यमंत्री से जांच की मांग
राजेंद्र भारती ने देष के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मध्यप्रदेष के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आग्रह किया है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, नरोत्तम मिश्रा जैसे नेता का भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण प्रदेश के लिए गंभीर खतरा है। प्रदेष के मुख्यमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और सख्त कार्रवाई करना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।