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AAP के प्रचार में शामिल होंगे शत्रुघ्न सिन्हा, TMC ने कांग्रेस को दिया संदेश

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नई दिल्ली। दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का साथ तेजी से बढ़ रहा है। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव के साथ ही तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी दिल्ली में ‘आप’ के समर्थन का खुला ऐलान कर दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस को स्पष्ट राजनीतिक संकेत देते हुए दिल्ली में ‘आप’ का प्रचार करने के लिए सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को मैदान में उतारने का फैसला किया है। सूत्रों ने कहा कि इंडिया गठबंधन के एक और घटक दल सपा भी अपने कुछ सांसदों या नेताओं को ‘आप’ के लिए प्रचार करने के लिए भेज सकती है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम कांग्रेस और इंडिया पार्टियों के बीच बढ़ती खाई को दर्शाता है। इनमें से कई दलों ने दिल्ली में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ ‘आप’ की कड़ी और जोरदार प्रतियोगिता में अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया है।

टीएमसी और सपा के अलावा, महाराष्ट्र में कांग्रेस के सहयोगी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने भी ‘आप’ का समर्थन किया है। इन सभी का मानना है कि केजरीवाल के ‘आप’ पार्टी दिल्ली में कांग्रेस की तुलना में भाजपा को हराने के लिए कहीं बेहतर स्थिति में दिखाई दे रही है।

पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, नई दिल्ली सीट पर लड़ रहे अरविंद केजरीवाल के अलावा मौजूदा मुख्यमंत्री और कालकाजी सीट से ‘आप’ प्रत्याशी आतिशी, जंगपुरा से मनीष सिसोदिया सहित ‘आप’ के कई शीर्ष नेताओं के लिए रैलियां रेंगे। ‘बिहारी बाबू’ के नाम से मशहूर अभिनेता के आने से राजधानी के पूर्वांचली वोटों के लिए मुकाबला और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या लगभग एक तिहाई है। माना जा रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा के दो सबसे प्रमुख पूर्वांचली स्टार प्रचारकों- मनोज तिवारी और रवि किशन के साथ टक्कर ले सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि ऐसी संभावना है कि बिहार से जुड़े एक और टीएमसी सांसद ‘आप’ के लिए प्रचार कर सकते हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा का ‘आप’ के लिए प्रचार करना कांग्रेस के लिए से कड़वा अनुभव रह सकता है क्योंकि राहुल गांधी ने खुद 2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले बॉलीवुड अभिनेता को भाजपा से दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कांग्रेस ने उन्हें पटना साहिब सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन वे हार गए थे। 2022 में वे कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हो गए थे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।