मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उभरते टेक उद्यमी और यूनोफिन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर एवं सीईओ सिद्धार्थ पाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए व्यवसायों की कार्यप्रणाली को नई दिशा दे रहे हैं। कई असफलताओं के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आज AI आधारित समाधान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिद्धार्थ पाल ने नौकरी के बजाय स्टार्टअप की राह चुनी। शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलता और धोखे का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा। ई-कॉमर्स से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने टेक्नोलॉजी के बदलते स्वरूप को समझा और अपने बिज़नेस को स्केल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर रुख किया। विभिन्न वर्कशॉप्स और प्रोग्राम्स के माध्यम से AI की गहरी समझ विकसित कर उन्होंने अपने व्यवसाय में ऑटोमेशन और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली लागू करनी शुरू की।
सिद्धार्थ की कंपनी यूनोफिन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, जो हाल ही में स्थापित हुई है, अब केवल आईटी तक सीमित नहीं बल्कि विभिन्न इंडस्ट्रीज़ को लॉजिकल और ऑटोमेशन आधारित कंसल्टेंसी दे रही है। उनका कहना है कि AI के ज़रिए कंपनियां मानव निर्भरता वाले कई रूल-बेस्ड टास्क ऑटोमेट कर सकती हैं, जिससे प्रोडक्टिविटी और निर्णय लेने की गति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने अपने बिज़नेस में कस्टमर सपोर्ट को भी पूरी तरह ऑटो-पायलट मोड पर शिफ्ट कर दिया है, जहां हजारों ग्राहक एक साथ बिना देरी के सेवा प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि वे AI को शक्तिशाली लेकिन “अनकंट्रोल्ड ब्रेन” मानते हैं। उनका कहना है कि इसका उपयोग समाज निर्माण के लिए भी किया जा सकता है और गलत दिशा में भी। डीपफेक, डेटा ब्रीच और फर्जी कंटेंट जैसे दुरुपयोग को लेकर वे सतर्क रहने की सलाह देते हैं। सिद्धार्थ का मानना है कि जैसे कंप्यूटर आने पर जॉब रोल बदले थे, वैसे ही AI के दौर में भी नौकरियां खत्म नहीं होंगी बल्कि नए अवसर पैदा होंगे। उनका लक्ष्य टेक्नोलॉजी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और भारत को AI इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत बनाना है।





