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मध्य प्रदेश की इन प्रतिभाशाली महिलाओं की सफलता की कहानियां, मेहनत के दम पर बनाई अपनी खुद की अलग पहचान…

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की कई युवा महिलाएँ अपनी मेहनत, जुनून और लगन से अपने-अपने क्षेत्रों में एक अलग पहचान बना रही हैं। चाहे वह मेकअप इंडस्ट्री हो, पत्रकारिता, उद्यमिता या डिजाइनिंग, ये महिलाएँ समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। भोपाल की भूमिका गौड़ सिंघल ने अपने बेहतरीन मेकअप स्किल्स से एक सफल मेकअप आर्टिस्ट के रूप में पहचान बनाई, वहीं रुचिका सचदेवा ने संघर्षों को पार कर सफलता की नई मिसाल कायम की। नंदिनी रतले ने अभिनय के क्षेत्र में अपना मुकाम बनाया, जबकि प्रेरणा रावत मालवीया ने इंजीनियरिंग से डिजाइनिंग की ओर कदम बढ़ाते हुए “परफेक्ट प्लेस डिजाइनर्स” की स्थापना की। वहीं, भोपाल की उद्यमी साक्षी जैन का “केक्स बाय साक्षी” ब्रांड आज सफलता की मिसाल बन चुका है। ये सभी कहानियाँ न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि यह भी साबित करती हैं कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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भोपाल की रहने वाली भूमिका गौड़ सिंघल, जो एक इंजीनियर और मार्केटिंग प्रोफेशनल रह चुकी हैं, ने अपने पेशन को पहचानते हुए मेकअप इंडस्ट्री में कदम रखा। उन्होंने शुरुआत में केवल अपनी स्किल्स सुधारने के लिए मेकअप कोर्स किया था, लेकिन धीरे-धीरे उनका झुकाव इस क्षेत्र में बढ़ता गया। लोगों द्वारा उनके मेकअप की सराहना मिलने के बाद, उन्होंने इसे एक प्रोफेशन के रूप में अपनाने का फैसला किया। भूमिका ने बिट्टन मार्केट स्थित एक प्रतिष्ठित अकादमी से प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट का कोर्स किया, जिसमें ब्राइडल, फैंटेसी, एयर ब्रश और एसएफएक्स (स्पेशल इफेक्ट्स) मेकअप शामिल थे।

वर्तमान में, भूमिका विभिन्न प्रकार की मेकअप सेवाएँ प्रदान कर रही हैं, जिनमें पार्टी मेकअप, सेलिब्रिटी मेकअप, कोरियन ग्लास स्किन मेकअप और नाइजीरियन स्किन टोन मेकअप शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मेकअप केवल बाहरी सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास बढ़ाने का भी एक सशक्त माध्यम है। उनकी प्रेरणा प्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट पारुल गर्ग हैं, और भविष्य में वे भी अपने स्तर पर एक मेकअप अकादमी खोलने की योजना बना रही हैं, जहाँ युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर इस इंडस्ट्री में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सके।

भूमिका का मानना है कि मेकअप की असली खूबसूरती तब उभरती है जब स्किन का ख्याल रखा जाए। वे सलाह देती हैं कि एक अच्छा स्किनकेयर रूटीन अपनाने से मेकअप ज्यादा प्रभावी दिखता है। नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाने, हाइड्रेटेड रहने और नाइट केयर रूटीन को अपनाने से त्वचा स्वस्थ बनी रहती है। वे चाहती हैं कि मेकअप को एक आर्ट के रूप में पहचाना जाए और इसे केवल कॉस्मेटिक टूल तक सीमित न रखा जाए।

भोपाल की जानी-मानी उद्यमी और क्वालिटी रेस्टोरेंट की डॉयरेक्टर रुचिका सचदेवा ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन अपने अटूट साहस और जिंदादिली के साथ हर चुनौती का सामना किया। अपने माता-पिता को एक सड़क दुर्घटना में खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया। कैंसर से जूझने के दौरान उन्होंने अपने मनोबल को मजबूत बनाए रखा और इस बीमारी से उबरने के बाद, कैंसर मरीजों की सहायता के लिए काउंसलिंग शुरू की।

अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, रुचिका ने 50 वर्षों से चल रहे क्वालिटी रेस्टोरेंट की कमान संभाली। अपने दिवंगत पति और ससुर की मेहनत को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने इस प्रतिष्ठान को और अधिक सशक्त बनाया। एक महिला उद्यमी होने के नाते, उन्होंने अपने स्टाफ और ग्राहकों के बीच एक सकारात्मक माहौल बनाए रखने में सफलता प्राप्त की। उनका मानना है कि किसी भी व्यवसाय में निरंतरता और गुणवत्ता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

समाज सेवा के प्रति अपने समर्पण को दिखाते हुए, रुचिका स्वच्छता अभियान की ब्रांड एंबेसडर बनीं। उन्होंने अपने प्रयासों से भोपाल की बिट्टन मार्केट को पॉलीथीन मुक्त बनाने में अहम योगदान दिया, जिससे लाखों प्लास्टिक बैग्स को गार्बेज में जाने से रोका गया। उन्होंने ‘स्वच्छता किटी’ की शुरुआत की, जिसमें स्थानीय लोग हर महीने एक छोटी राशि का योगदान देते हैं, जिससे स्वच्छता से जुड़े कार्य किए जाते हैं। उनकी कहानी न केवल संघर्ष की मिसाल है, बल्कि यह दिखाती है कि जीवन की चुनौतियों को सकारात्मकता और हिम्मत के साथ कैसे जीता जा सकता है।

नंदिनी रतले, जो कि एक अभिनेत्री फ़िल्म एंड टीवी इंडस्ट्री के साथ उद्घोषक आकाशवाणी भोपाल भी हैं। जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक न्यूज़ रीडर के रूप में की थी, आज फिल्म और वेब सीरीज की दुनिया में एक चर्चित नाम बन चुकी हैं। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2011 में मीडिया जगत से की और धीरे-धीरे अभिनय की ओर कदम बढ़ाया। सत्याग्रह फिल्म में एक रिपोर्टर के रूप में उनके छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदार ने उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे खोल दिए। उनका मानना है कि सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और सही अवसरों को पहचानने से मिलती है।

हाल ही में, नंदिनी ने ‘पटना शुक्ला’ में रवीना टंडन के साथ अभिनय किया और इसके अलावा वे ‘तिवारी’, ‘मिस्टर सक्सेना’ और ‘दी गेम ऑफ गिरगिट’ जैसी वेब सीरीज में भी नज़र आएंगी। उनका अभिनय विभिन्न शैलियों में दिखता है, जहाँ वे कभी एक नर्स, कभी वकील, तो कभी एक सामाजिक मुद्दों पर आधारित किरदार निभाते हुए दिखाई देती हैं। वे मानती हैं कि अभिनय केवल प्रसिद्धि पाने का जरिया नहीं, बल्कि एक कला है, जिसमें पूरी टीम का सहयोग होता है और हर किरदार, चाहे छोटा हो या बड़ा, मायने रखता है। नंदिनी रतले को
मिस ग्लोरी ऑफ़ इंडिया और मिस ब्यूटीफुल स्माइल पेजेंट विनर 2012 का खिताब भी मिल चुका है।

नंदिनी की सफलता की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पत्रकारिता में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के लिए कई प्रोग्राम किए और एंकरिंग व स्क्रिप्ट राइटिंग में भी योगदान दिया। उनका सपना है कि उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो और उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।

मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित “परफेक्ट प्लेस डिजाइनर्स” की संस्थापक प्रेरणा रावत मालवीया ने अपने सफर की शुरुआत इंजीनियरिंग की पढ़ाई से की। उज्जैन में जन्मी और पढ़ी-लिखी प्रेरणा शुरुआत में एरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहती थीं, लेकिन सिविल इंजीनियरिंग में आने के बाद उन्हें कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में रुचि बढ़ने लगी। पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ वर्षों तक कॉलेज में लेक्चरर के रूप में कार्य किया, लेकिन फिर फील्ड वर्क करने का निर्णय लिया। कई सालों तक इंटीरियर डिजाइनिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने के बाद, उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया।

आज, प्रेरणा अपने पति के साथ मिलकर “परफेक्ट प्लेस डिजाइनर्स” का संचालन कर रही हैं और इंदौर सहित अन्य शहरों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी हैं। उनके द्वारा किए गए प्रमुख प्रोजेक्ट्स में “पर्सिस्टेंट” आईटी कंपनी का इंदौर ऑफिस शामिल है, जिसका पूरा इंटीरियर और एग्जीक्यूशन कार्य उनकी कंपनी ने किया। इसके अलावा, वह मुख्य रूप से रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करती हैं और बंगलों व घरों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती हैं।

प्रेरणा का सपना है कि अगले चार से पाँच वर्षों में उनकी कंपनी मध्य प्रदेश के विभिन्न बड़े शहरों में स्थापित हो और लोगों के सपनों के घरों को साकार करे। वह विशेष रूप से महिलाओं के लिए कार्य करने का अवसर प्रदान करना चाहती हैं और एक ऐसा ऑफिस बनाना चाहती हैं, जहाँ पूरा स्टाफ केवल महिलाएँ हों। उनका मानना है कि महिलाओं को कंस्ट्रक्शन और डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए और अपने हुनर का प्रदर्शन करना चाहिए।

भोपाल की रहने वाली और कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में ग्रैजुएट साक्षी जैन ने लॉकडाउन के दौरान अपने जुनून को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। 2020 में जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब उन्होंने अपने क्लाउड किचन “केक्स बाय साक्षी” की शुरुआत की। नौकरी में दिलचस्पी न होने और खुद का कुछ अलग करने की चाहत ने उन्हें बेकिंग को प्रोफेशन बनाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में दोस्तों और रिश्तेदारों से मिले प्रोत्साहन और सकारात्मक प्रतिक्रिया ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार किया, जिससे उनका ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हुआ।

आज “केक्स बाय साक्षी” 25 से अधिक फ्लेवर्स में केक्स और विभिन्न प्रकार की बेकरी आइटम्स उपलब्ध कराता है। वेडिंग केक्स, इंगेजमेंट केक्स, एनिवर्सरी, बर्थडे और अन्य विशेष अवसरों के लिए कस्टमाइज्ड केक्स बनाने में उनकी खास पहचान बन चुकी है। साक्षी की यह कोशिश रहती है कि ग्राहकों को बेहतरीन क्वालिटी के साथ किफायती कीमतों में स्वादिष्ट केक्स मिलें। उनकी बेकरी मिनी केक्स, कपकेक्स, चॉकलेट्स और अन्य बेकरियाना प्रोडक्ट्स की एक विस्तृत रेंज भी प्रदान करती है। उनकी मार्केटिंग रणनीति, कस्टमर-फ्रेंडली एप्रोच और लगातार क्वालिटी मेंटेन करने की प्रतिबद्धता के कारण आज उनकी बेकरी भोपाल में एक लोकप्रिय नाम बन गई है।

साक्षी की योजना अपने ब्रांड को और अधिक विस्तार देने की है। वे न केवल भोपाल में बल्कि अन्य शहरों में भी आउटलेट्स खोलने की तैयारी में हैं, ताकि अधिक से अधिक ग्राहकों तक उनकी सेवाएँ पहुँच सकें। उनका लक्ष्य एक ऐसा बेकरी ब्रांड बनाने का है जो क्वालिटी प्रोडक्ट्स के साथ-साथ अफोर्डेबल हो, जिससे हर व्यक्ति प्रीमियम केक का आनंद उठा सके। उनकी सफलता की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपने जुनून को पेशे में बदलना चाहते हैं और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना चाहते हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।

बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।