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6 राज्यों में खूब चलेगी आंधी, बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

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नई दिल्ली। मार्च का महीना खत्म होने जा रहा है। आमतौर पर होली के बाद तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है, लेकिन शायद ये किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि मार्च की गर्मी मई-जून का अहसास कराएगी। देश के कई हिस्सों में मार्च में ही तापमान 40 के पार चला गया है।

मौसम विभाग ने पहले ही अप्रैल को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। इसके मुताबिक, अप्रैल की गर्मी इस बार रिकॉर्ड तोड़ने वाली है। हालांकि आने वाले दिनों में कुछ राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

बीते 24 घंटे में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और असम में काफी तेज हवाएं चलीं। इन हवाओं ने धूप में निकलने वालें लोगों को फौरी तौर पर तो राहत दे दी, लेकिन झुलसाने वाली गर्मी से इतनी आसानी से राहत नहीं मिलने वाली। पश्चिम बंगाल में तो काफी गर्म हवाएं चल रही हैं।

हर रोज अधिकतम तापमान दर्ज होने का रिकॉर्ड टूट रहा है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, महाराष्ट्र के चंद्रपुर और ओडिशा के संबलपुर में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान दर्ज किया गया, जो 42 डिग्री सेल्सियस रहा।

मौसम विभाग के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से से तमिलनाडु तक निम्न दबाव की रेखा बनी हुई है। वहीं बंगाल की खाड़ी और नगालैंड में चक्रवात संचालन बना हुआ है। मौसम विभाग ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में 3 अप्रैल तक बिजली चमकने, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

31 मार्च को गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में वज्रपात की संभावना जताई गई है। 1, 2 और 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, आंध्र प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में बिजली चमकने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिमालीय क्षेत्र, मध्य भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत समेत दक्षिणी प्रायद्वीप और महाराष्ट्र में 3 अप्रैल में तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा। लेकिन उत्तर पश्चिम भारत में 5 से 7 डिग्री की बढ़ोतरी तापमान में होगी।

वहीं गुजरात में 1 अप्रैल तक तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा बिहार में भी 1 अप्रैल तक तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।