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कांग्रेस और भाजपा में सस्ता सिलिंडर को लेकर मचा घमासान

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रायपुर। कांग्रेस और बीजेपी में सस्ता सिलिंडर को लेकर घमासान मचा है। कांग्रेस ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में सरकार बनने के बाद वह सबसे सस्ता सिलिंडर देंगे, वहीं भाजपा ने कांग्रेस को 2018 के घोषणा-पत्र की याद दिलाते हुए कहा कि पुराने वादा पहले पूरा कर लें फिर सस्ते सिलिंडर की बात हो। रसोई गैस सिलिंडर व महिलाओं की सुविधाओं को लेकर कांग्रेस-भाजपा में अब घमासान छिड़ चुका है।

कांग्रेस की महिला पदाधिकारी व प्रवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में सबसे सस्ता रसोई गैस सिलिंडर यहां की महिलाओं का मिलेगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय मीडिया कोआर्डिनेटर राधिका खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह गारंटी देती है कि चुनाव जीतने के बाद हम तुरंत ही प्रदेश की महिलाओं के खाते में गैस सिलिंडर पर 500 रुपये की सब्सिडी सीधा ट्रांसफर करेंगे। उज्ज्वला रसोई गैस लेने वाली महिलाओं को रसोई गैस 107 रुपये में मिलेगा। कांग्रेस का वायदा हर वर्ग के लिए हैं।

कांग्रेस-यूपीए सरकार के दौरान जब सिलिंडर 414 रुपये में मिलता था। तब भाजपा के वर्तमान मंत्री धरना-प्रदर्शन करते थे,लेकिन आज जब देश भर में सिलिंडर 1000 रुपये के पार हो चुका है। तब सभी मंत्री इस पर मौन है। महिलाओं के लिए राज्य सरकार ने दाई दीदी क्लिनिक योजना की शुरुआत की। पार्टी की कार्यकर्ता महतारी न्याय योजना के बारे में चर्चा कर रही है। सिलिंडर के दाम कम करना हो या 200 रुपये यूनिट तक बिजली बिल माफ करना हो। यह सब महिलाओं को बड़ी राहत पहुंचाएगी। पत्रकारवार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत, बबीता नत्थानी, निवेदिता चटर्जी, लक्ष्मी देवांगन, पूजा देवांगन, चंद्रवती साहू, साक्षी सिरमौर, प्रेरणा साहू उपस्थित थी।

वही भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रवक्ता लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि जरा कांग्रेस की बहनों को एक बार 2018 का जनघोषणा पत्र पढ़ लेना चाहिए, जिसमें कांग्रेस ने पांच सिलिंडर देने का वादा किया था, लेकिन नहीं दिए। देश का सबसे बड़ा त्यौहार आने वाला है। हम अपने घरों में दिए जलाएंगे व बिजली के झालर लगाएंगे, लेकिन क्या कांग्रेस की राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर और मेरी कांग्रेस की बहने भूपेश बघेल से पूछने की हिम्मत करेगी की 18 लाख गरीबों को जो उसने मकान नहीं दिया है वह क्या करेंगे।

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में हर थानों में महिला हेल्प डेस्क खोलने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस के शासन में हर दिन तीन से चार बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। राजधानी रायपुर में एक व्यक्ति खुलेआम एक बालिका को गंडासे से गोदते घूमता है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है। शराबबंदी के बारे में जरा सरकार से पूछे, महिला स्वसहायता समूह के कर्ज माफी के बारे में जरा कांग्रेस प्रवक्ता पूछे फिर महिलाओं के बारे में बड़े-बड़े दावे करें। भाजपा ने कहा कि याद रखें महिलाएं अब कांग्रेस के झूठे वादे में फंसने वाली नहीं है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।