नई दिल्ली। कांग्रेस हाईकमान में उत्तराखंड में संगठन में फेरबदल कर एक प्रकार से विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। भाजपा जिस तेजी से चुनावी मोड़ में आ चुकी है, उसे देखते हुए कांग्रेस के लिए जरूरी हो गया था कि वो अब ज्यादा देर न करे। गणेश गोदियाल के रूप मे तीखे तेवर वाले कप्तान, अनुभव के लिहाज से प्रीतम सिंह और सांगठनिक सक्रिय नेता के रूप में हरक सिंह से उम्मीद की जा रही है कि वो संगठन में नई ऊर्जा भर सकेंगे।
मालूम हो कि गोदियाल इससे पहले भी 2021 से 2022 तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। तब भी उन्हें विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कमान सौंपी गई थी। लेकिन संगठन को पुनर्गठित करने के लिए उनके पास सीमित समय था। इस बार, चुनाव में लगभग एक वर्ष का समय शेष है, इसलिए गोदियाल को संगठन को नए सिरे से खड़ा करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का पूरा अवसर मिलेगा। हालांकि गोदियाल का पिछला कार्यकाल अल्पावधि का था, लेकिन फिर भी वो छाप छोड़ने में सफल रहे थे।
2002 में गोदियाल थलीसैंण से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे। इस विधानसभा चुनाव में गोदियाल ने भाजपा के बड़े नेता डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को शिकस्त दी थी। इसके बाद वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में गोदियाल को हार का सामना करना पड़ा।
पार्टी हाईकमान के इस निर्णय से पूर्व सीएम हरीश रावत की ब्राह्मण चेहरों को आगे बढ़ाने की मुराद पूरी हो गई है। कुछ समय पहले हरीश ने सोशल मीडिया पर मन की बात रखी थी। उन्होंने संगठन में ब्राह्मण नेताओं को तरजीह की पैरवी की थी। हाईकमान ने ब्राह्मण चेहरे के रूप में जहां गोदियाल को जिम्मेदारी दी वहीं, जातीय समीकरणों के अनुसार प्रीतम व हरक को अहम दायित्व देते हुए सियासी और जातीय संतुलन भी साधा है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद गणेश गोदियाल का प्राथमिक लक्ष्य संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करना रहेगा। जिलों से लेकर ब्लॉक स्तर तक निष्क्रिय पड़ी इकाइयों को पुनः सक्रिय करने और युवा नेतृत्व को आगे लाने जैसे निर्णय ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही नई प्रदेश कार्यकारिणी टीम का गठन भी किया जा सकता है।
गोदियाल ने उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त कदम रखा, जब राठ क्षेत्र की सियासत में दो दिग्गजों का बोलबाला था। इनमें कांग्रेस से 8 बार के विधायक डॉ.शिवानंद नौटियाल व भाजपा से डॉ. रमेश पोखरियाल‘निशंक’ शामिल थे। गोदियाल यूं तो जाना-पहचाना नाम हैं, पर अचानक जिस तरह से अध्यक्ष पद की कुर्सी पर उनकी ताजपोशी हुई है, कांग्रेस का एक खेमा अचंभित भी है।
वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद थलीसैंण, श्रीनगर विस का हिस्सा बन गया। 2012 में भी गोदियाल ने श्रीनगर से चुनाव लड़ा। इस बार उन्होंने भाजपा के धन सिंह रावत को हराया। वर्ष 2017 में वह नजदीकी मुकाबले में धन सिंह से हार गए। 2021 में कांग्रेस ने गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष पद का जिम्मा दिया पर 2022 के विधानसभा चुनाव में गोदियाल फिर धन सिंह से हार गए। इसके बाद उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर करन माहरा को प्रदेश संगठन की कमान दी गई। 2024 में गोदियाल कांग्रेस के टिकट पर गढ़वाल लोकसभा सीट से लड़े थे, पर उन्हें भाजपा के अनिल बलूनी ने हरा दिया था।
पूर्व सीएम हरीश रावत को इस बार संगठन में सीमित भूमिका में रखा गया है। कांग्रेस का फोकस अब दूसरी पीढ़ी के चेहरों पर है। हालांकि पार्टी अब भी उनके अनुभव और जनाधार को मान्यता देती है, परंतु हाईकमान स्पष्ट संकेत दे चुका है कि चुनाव 2027 की दिशा में कांग्रेस का चेहरा नई पीढ़ी के नेताओं पर केंद्रित रहेगा। कुछ दिन पहले खुद हरीश ने खुद इसके संकेत भी दिए थे।
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस गणेश गोदियाल ने कहा कि मैं कभी पद के पीछे नहीं भागा लेकिन जब जो जिम्मेदारी मिली, उसे पूरा करने का भरकस प्रयास किया। पार्टी ने अब बड़ी जिम्मेदारी देकर भरोसा जताया है। सबको साथ लेकर चलूंगा, वरिष्ठों का हाथ हमेशा अपने सिर पर चाहूंगा। मिशन 2027 है, उसे पूरा करने के लिए जीजान लगा दूंगा। निवर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि गणेश गोदियाल को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में हम सब मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए पूरी मेहनत और समर्पण के साथ कार्य करेंगे।





