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युवा बना रहे विभिन्न क्षेत्रों में अपना करियर, इन युवाओं ने योग, डांस और फैशन में सफलता की नई मिसाल की पेश

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नई दिल्ली। योग से जीवन की नई शुरुआत” के तहत अजय यादव ने अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए योग को अपनाया और उसे न केवल अपने शरीर और मानसिकता को सशक्त बनाने के लिए, बल्कि एक जीवनशैली के रूप में स्वीकार किया। “खुशियाली क्लोसेट” के संस्थापक रजत बरडे ने एक साल पहले अपने स्टोर की शुरुआत की थी और अब यह सफलतापूर्वक ग्राहकों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है। वहीं, कोरियोग्राफर प्रतीक मालवीय बॉलीवुड डांस को एक नई पहचान देना चाहते हैं, और अकांश कैथल डांस के माध्यम से अपने छात्रों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। इन सभी की प्रेरणादायक यात्राएं यह दर्शाती हैं कि संघर्ष और समर्पण से किसी भी सपने को हकीकत में बदला जा सकता है।

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योग से जीवन की नई शुरुआत: अजय यादव की प्रेरणादायक यात्रा
मध्य प्रदेश के भोपाल के योग और मेडिटेशन एक्सपर्ट अजय यादव ने अपनी योग यात्रा की शुरुआत 2018 में की थी। उन्होंने बताया कि योग के प्रति उनका रुझान बचपन से ही था, और योग से जुड़ने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। अजय यादव का मानना है कि योग सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, शारीरिक संतुलन और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने का एक अद्भुत तरीका है। उन्होंने 2019 में योग का मास्टर कोर्स जॉइन किया और अपनी यात्रा की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने हजारों लोगों को योग के लाभ के बारे में बताया और एक नई राह पर चलने के लिए प्रेरित किया।

ऋषिकेश और बैंगलोर से भोपाल तक: योग की दुनिया में अजय का विस्तार
अजय यादव की योग यात्रा सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऋषिकेश में करीब 10-11 महीने बिताए और वहां योग और मेडिटेशन के गहरे आयामों को सीखा। इसके बाद, बैंगलोर का दौरा किया, लेकिन वहां उन्हें अपनी वास्तविक संतुष्टि नहीं मिली। उन्होंने फिर अपने गृहनगर भोपाल लौटकर 2023 में खुद का योग सेंटर खोला और अब तक 200 से अधिक छात्रों को योग सिखाया है। उनका उद्देश्य यह है कि योग को हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि वे शारीरिक और मानसिक शांति प्राप्त कर सकें।

योग का महत्व: अजय यादव की दृष्टि से एक नई जीवनशैली
अजय यादव का मानना है कि योग सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह जीवन को एक नई दिशा और उद्देश्य देता है। वे योग को न सिर्फ शारीरिक फिटनेस बल्कि मानसिक शांति और जीवन के अन्य पहलुओं को सुधारने का एक आवश्यक हिस्सा मानते हैं। उनका कहना है कि योग से न केवल शरीर की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि यह मानसिक स्थिति को भी सुधारता है, शरीर के पोस्चर को बेहतर बनाता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है। उनका सपना है कि हर व्यक्ति को योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए, जैसे हम भोजन और पानी को अहमियत देते हैं।

खुशियाली क्लोसेट: रजत बरडे की एक साल की सफल यात्रा
मध्य प्रदेश के भोपाल से खुशियाली क्लोसेट के फाउंडर रजत बरडे ने 20 मार्च को अपने स्टोर की एक साल की यात्रा का जश्न मनाया। यह स्टोर 2020 में ऑनलाइन शुरू हुआ था और केवल दो महीने में भव्य रूप से ओपन हुआ। रजत ने अपनी यात्रा की शुरुआत कॉर्पोरेट जॉब से की थी, लेकिन उनके दिल में हमेशा बिज़नेस करने का सपना था। घर में बहनों के बीच फैशन और कपड़ों के प्रति रुचि ने उन्हें इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आज, एक साल बाद, उनका स्टोर ग्राहकों से शानदार रिस्पॉन्स प्राप्त कर रहा है और उनका उद्देश्य इसे और विस्तारित करना है।

खुशियाली क्लोसेट: सीमित स्टॉक, शानदार ट्रेंड्स
रजत बरडे ने खुशियाली क्लोसेट में स्टॉक रखने की एक नई रणनीति अपनाई है। उनका मानना है कि ज्यादा स्टॉक रखने की बजाय सीमित लेकिन ट्रेंडी और उच्च गुणवत्ता वाली चीज़ों को रखना ही कस्टमर की पसंद को बेहतर तरीके से पूरा करता है। इस अनोखे दृष्टिकोण ने उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स दिलाया है। उनका ब्रांड रीज़नेबल प्राइस रेंज में हैंड पैक्ड और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पेश करता है, जिससे ग्राहक हर बार एक अलग अनुभव प्राप्त करते हैं। इस सफल बिज़नेस मॉडल ने उन्हें आने वाले समय में और ब्रांचेस और एक वेबसाइट लॉन्च करने के लिए प्रेरित किया है।

आगे बढ़ता खुशियाली क्लोसेट: नया लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं
रजत बरडे का खुशियाली क्लोसेट अब सिर्फ भोपाल तक ही सीमित नहीं रहेगा। उनका लक्ष्य आने वाले दो से तीन सालों में नए आउटलेट्स खोलने और अपनी ऑनलाइन उपस्थिति को और मजबूत करना है। एक वेबसाइट लॉन्च करने की योजना के साथ, रजत चाहते हैं कि खुशियाली क्लोसेट न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों और शहरों में भी अपनी पहचान बनाए। इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर आ रहे ऑर्डर्स को देखते हुए उनका यह विश्वास मजबूत हुआ है कि आने वाले समय में उनका ब्रांड और भी विस्तार करेगा।

प्रतीक मालवीय: हॉस्टल से बॉलीवुड तक का डांस सफर
मध्य प्रदेश के भोपाल से जुड़े कोरियोग्राफर प्रतीक मालवीय का डांस सफर एक दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी है। शुरुआत उनकी बहन के डांस और एक्टिंग के प्रति प्रेम से हुई, जो उन्हें डांस की ओर आकर्षित करता था। हालांकि उन्होंने कभी डांस क्लास जॉइन नहीं किया, लेकिन हॉस्टल के दिनों में अपने दोस्तों को डांस सिखाना और हनी सिंह के गानों पर डांस करना उनके लिए एक नए रास्ते की शुरुआत साबित हुआ। इसने उन्हें ना सिर्फ खुद का टैलेंट दिखाने का मौका दिया, बल्कि स्कूल और कॉलेज के कार्यक्रमों में भी अपनी पहचान बनाई। आज, प्रतीक का डांस करियर बॉलीवुड के बड़े नामों तक पहुंचने के करीब है।

प्रतीक मालवीय का डांस: हॉस्टल से लेकर प्रोफेशनल करियर तक
प्रतीक मालवीय की जर्नी केवल स्कूल के कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रही, उन्होंने अपने डांस के जुनून को एक पेशेवर करियर में बदला। भोपाल लौटने के बाद, प्रतीक ने डांस क्लास जॉइन की और विभिन्न शैलियों में अपने हुनर को निखारा। उन्होंने डांस प्लस ऑडिशन में भाग लिया और शिलांडे सर से वर्कशॉप भी ली, जो उनके लिए एक प्रेरणा साबित हुई। उनका मानना है कि अच्छे डांस के लिए सिर्फ तकनीकी अभ्यास ही नहीं, बल्कि महीने भर की मेहनत और अनुभव जरूरी है। अब, उनका लक्ष्य बॉलीवुड डांस को एक नई ऊंचाई तक ले जाना है।

प्रतीक मालवीय: बॉलीवुड डांस को एक नई पहचान देना चाहते हैं
कोरियोग्राफर प्रतीक मालवीय का सपना है कि वह बॉलीवुड डांस को अपनी पहचान दिलाएं। उनका मानना है कि बॉलीवुड डांस शैली में एक खास आकर्षण है, जो हर किसी को पसंद आती है। गणेश आचार्य के काम से प्रेरित होकर, प्रतीक भी बॉलीवुड डांस को फैलाने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें मौका मिला, तो वह बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाने के लिए इस कला को लोगों के सामने पेश करेंगे और अपनी डांस शैली से एक नई लहर लाएंगे।

अकांश कैथल: डांस के माध्यम से अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणादायक यात्रा
भोपाल के जोशीले कोरियोग्राफर अकांश कैथल का डांस सफर स्कूल के दिनों से शुरू हुआ, जब उन्होंने रियलिटी शोज़ देखे और सोचा कि वह भी एक दिन ऐसा कर सकते हैं। 2015 में उन्होंने अपने डांस करियर को प्रोफेशनल रूप से शुरू किया और 2018 में “लोलारेणा डांस स्टूडियो” खोला। इसके बाद उन्होंने कई छात्रों को प्रशिक्षित किया, जिनमें से कई शीर्ष रियलिटी शोज़ तक पहुंचे। उनका मानना है कि डांस में सफलता के लिए कड़ी मेहनत और निरंतरता जरूरी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वह नए डांसर्स के लिए एक बडी अवसर प्रदान करने का काम कर रहे हैं।

अकांश कैथल: डांस, डिजिटल मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट का जादू
अकांश कैथल के पास केवल डांस का ही जुनून नहीं है, बल्कि वह एक सफल व्यवसायी भी हैं। उन्होंने “लोलारेणा स्टूडियो” की सफलता के बाद, “लोलारेणा सर्विसेज़” नामक एक प्रमुख डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी की भी शुरुआत की। साथ ही, वह एक प्रमाणित वेब डेवलपर भी हैं और व्यवसायों को उनकी डिजिटल उपस्थिति बढ़ाने में मदद करते हैं। उनका मानना है कि डांस और डिजिटल मार्केटिंग दोनों का संयोजन आने वाले समय में बहुत प्रभावी साबित हो सकता है, और वह इसे अपने छात्रों के करियर में भी लागू करते हैं।

अकांश कैथल का सपना: डांस इंडस्ट्री में एक इन्फ्लुएंसर के रूप में पहचान बनाना
अकांश का मुख्य लक्ष्य डांस इंडस्ट्री में एक इन्फ्लुएंसर बनना है, जो न केवल खुद को बल्कि अपने छात्रों को भी सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाए। वह मानते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब ने डांसर्स के लिए कई नए अवसर खोले हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का सही इस्तेमाल करके, वह नए और पुराने डांसर्स को अपनी मेहनत और टैलेंट को दुनिया के सामने लाने का मौका देना चाहते हैं। उनका यह सपना है कि उनके छात्रों की मेहनत और संघर्ष के बाद वे भी एक दिन उस स्तर तक पहुँचें, जहां उनकी पहचान देशभर में हो।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।

बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

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