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आंबेडकर पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी, नड्डा के घर NDA की बैठक

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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के मौके पर बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के आवास पर बैठक की। सूत्रों ने बताया कि एनडीए नेताओं ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर कांग्रेस के हालिया राजनीतिक हमले पर चर्चा की और विपक्ष के इन आरोपों का मुकाबला करने के लिए एक स्वर में जवाब देने पर जोर दिया। कांग्रेस ने शाह पर बी. आर. आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाते हुए हमला किया है। गृह मंत्री ने विपक्षी पार्टी पर उनके भाषण की एक छोटी क्लिप का इस्तेमाल कर उनकी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है।

एनडीए के बड़े नेता हुए शामिल
सूत्रों के अनुसार शाह और नड्डा ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन का ध्यान सुशासन और लोगों के कल्याण पर होना चाहिए, जिसके लिए उसे जनता का समर्थन मिला है। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, जद (यू) नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, अपना दल (एस) की अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ-साथ जद (एस) नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी मौजूद थे।

एनडीए द्वारा समन्वय को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक तंत्र स्थापित किए जाने पर जोर दिया गया और कहा गया कि इसके सदस्य प्रमुख मुद्दों पर परामर्श करना जारी रखेंगे तथा मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता नियमित रूप से सांसदों से मिलेंगे। बैठक में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (एस) नेता जीतन राम मांझी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा और भारत धर्म जन सेना के अध्यक्ष तुषार वेल्लापल्ली भी मौजूद थे।

सुशासन के मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक के एजेंडे के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में सुशासन और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। सुशासन वाजपेयी सरकार का एक प्रमुख विषय था। पहली बार सफलतापूर्वक गठबंधन सरकार चलाने वाले दिग्गज भाजपा नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर एनडीए की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

नड्डा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”आज नयी दिल्ली में एनडीए नेताओं की बैठक में भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत अभूतपूर्व मील के पत्थर हासिल कर रहा है और खुद को वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।” उन्होंने कहा, “एनडीए सरकार सभी के लिए एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के वास्ते ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में दृढ़ है।

अटल बिहारी वाजपेयी को भी किया गया याद
उत्तर प्रदेश की निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने कहा कि वाजपेयी की जन्मशती के अवसर पर एनडीए नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक थी। उन्होंने कहा, “हमारी भविष्य की रणनीति मिलकर आगे बढ़ने की है। हमें आगामी सभी चुनावों में एकता दिखानी होगी। बैठक में सभी ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में जीत के लिए भाजपा नेताओं को बधाई दी।

निषाद ने कहा कि बैठक में गठबंधन की रणनीति पर भी चर्चा की गई ताकि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए गए ‘सभी काम’ जमीन तक पहुंचें और ‘चुनाव के दौरान लोगों से किए गए वादे’ पूरे हों। उन्होंने कहा कि बैठक में मछुआरा समुदाय को आरक्षण देने का मुद्दा भी उठा। उन्होंने कहा, “मैंने मछुआरा समुदाय को आरक्षण देने के मुद्दे पर 30-37 पेज का साक्ष्य दिया था क्योंकि यह एक चुनावी वादा था। वे एक सप्ताह बाद हमें बुलाएंगे और इस पर चर्चा करेंगे।”

यह पूछे जाने पर कि क्या आंबेडकर पर शाह की टिप्पणी के मुद्दे पर बैठक में चर्चा हुई, निषाद पार्टी प्रमुख ने कहा, हम लोगों के कल्याण के लिए आए हैं। उसमें सफलता कैसे प्राप्त की जाए, उस पर ऊर्जा खर्च करने की जरूरत है।” विपक्षी दलों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि नकारात्मक विचारों का जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है।

एनडीए की बैठक ‘एक देश एक चुनाव’ संबंधी विधेयक के संसद में पेश किए जाने के कुछ दिन बाद हुई है। एनडीए के घटक दलों ने इसका समर्थन किया है। एक साथ चुनाव कराने के लिए दो विधेयकों को हाल ही में संपन्न संसद सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। बाद में इसे विचार के लिए संसद की संयुक्त समिति में भेजा गया था। समिति की बैठक आठ जनवरी को होने की उम्मीद है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।