भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित SMH IVF एंड फर्टिलिटी सेंटर की सेंटर हेड, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Obstetrician & Gynecologist) और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने बचपन में देखी एक दर्दनाक प्रसूति घटना को अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट बताया। उन्होंने कहा कि मात्र आठ वर्ष की आयु में उन्होंने संकल्प लिया था कि वे महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व के लिए काम करेंगी। इसी उद्देश्य ने उन्हें कठिन परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सा शिक्षा की राह पर आगे बढ़ाया और आज वे हजारों महिलाओं के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन चुकी हैं।
डॉ. तिवारी ने बताया कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने के बावजूद उनके माता-पिता ने समाज की परंपरागत सोच का सामना करते हुए उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट रैंक हासिल की, प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों से MBBS, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञता तथा IVF में सुपर स्पेशलाइजेशन पूरा किया। उनका कहना है कि निसंतानता केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी विषय है और उनका लक्ष्य है कि किसी भी महिला को इस कारण मानसिक या सामाजिक पीड़ा का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता आज प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान महिला की देखभाल केवल उसकी नहीं बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। चिकित्सकीय सेवाओं के साथ-साथ डॉ. पूर्णिमा मॉडलिंग, लेखन और महिला सशक्तिकरण अभियानों से भी जुड़ी हैं। उनका उद्देश्य अपने मंच और पहचान का उपयोग महिलाओं में स्वास्थ्य जागरूकता, आत्मविश्वास और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करना है।





