MP Desk: भोपाल की तीन प्रेरणादायक महिलाओं ने अपने हुनर और मेहनत से न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश की है। इनमें से एक ने रेकी के जरिए जीवन बदलने वाले अनुभव साझा किए, दूसरी ने आर्ट एंड क्राफ्ट के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई, और तीसरी ने रेजिन आर्ट के जरिए क़ीमती यादों को प्रिज़र्व करने की अनूठी पहल की।

मध्यप्रदेश के भोपाल में रेकी मास्टर और हीलर अनीता गुप्ता ने रेकी और उसके सकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि रेकी एक जापानी टच हीलिंग थेरेपी है, जो मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर गहरे प्रभाव डालती है। अनीता का कहना है कि रेकी से न केवल तनाव दूर होता है, बल्कि आत्मविश्वास, रचनात्मकता और इम्यूनिटी भी बढ़ती है। उन्होंने अपनी संस्था “कॉस्मिक रिदम” का उल्लेख किया, जो पारंपरिक और प्रामाणिक रेकी सिखाने वाली भारत की प्रमुख संस्थाओं में से एक है।
अनीता गुप्ता ने अपने जीवन के संघर्ष भरे दिनों का ज़िक्र करते हुए बताया कि उनके पति के निधन के बाद उन्हें गंभीर वित्तीय समस्याओं और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में रेकी ने न केवल उन्हें मानसिक और भावनात्मक शक्ति दी, बल्कि उनके जीवन को सकारात्मक दिशा भी दी। अनीता ने रेकी को अपनाकर न केवल अपनी बेटियों की परवरिश की, बल्कि अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू किया। उनकी दोनों बेटियां आज इंजीनियर हैं, और अनीता ने खुद रेकी मास्टर बनकर कई लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया।
रेकी की transformative शक्ति को लेकर अनीता ने कहा कि यह न केवल आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि जीवन के नकारात्मक पहलुओं को भी दूर करने में मदद करती है। उन्होंने अपनी स्कूटी से लेकर कार तक का सफर और जीवनशैली में आए बदलावों को रेकी के सकारात्मक प्रभाव का परिणाम बताया। उनका मानना है कि सही दिशा और प्रामाणिक शिक्षण से रेकी का गहरा और जल्दी असर होता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों को रेकी को अपनाने और खुद इसे सीखने का सुझाव दिया।

भोपाल की रहने वाली और “इशिका क्रिएशंस” की फाउंडर सीमाक्षी शर्मा ने 2014 में अपनी कला और शौक को व्यवसाय में बदलने का सफर शुरू किया। शादी के बाद सीमाक्षी को समय की कमी के कारण अपने शौक को जारी रखना मुश्किल हो गया, लेकिन जब उनके बच्चे बड़े हुए, तो उन्होंने अपने आर्ट और क्राफ्ट के शौक को फिर से अपनाया। सीमाक्षी ने छोटी-छोटी क्राफ्टिंग वस्तुएँ जैसे तोरण, शुभ लाभ, और क्ले आइटम बनाना शुरू किया, जो दोस्तों और पड़ोसियों को बहुत पसंद आईं। जल्द ही उन्हें किटी पार्टियों और अन्य आयोजनों के लिए ऑर्डर मिलने लगे, और उनके काम को नई पहचान मिली।
सीमाक्षी ने बताया कि उनके व्यवसाय को “ब्राह्मण क्लब” और अन्य समूहों से बहुत सहयोग मिला, जिसने उनके स्टार्टअप को नई दिशा दी। उनका मुख्य उत्पाद करवाचौथ थाली, शुभ लाभ, और अन्य पारंपरिक क्राफ्ट आइटम हैं, जिन्हें ग्राहक बहुत पसंद करते हैं। शुरू में परिवार से समर्थन न मिलने के बावजूद, उनके काम की सराहना और बढ़ते ऑर्डर ने उनकी मेहनत को मान्यता दी। अब परिवार भी उनके साथ है, और सीमाक्षी अपने उत्पादों की मार्केटिंग घर से ही करती हैं। वह स्थानीय प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाती हैं और ऑर्डर्स को खुद मैनेज करती हैं, जिसमें कई बार दूर-दराज के स्थानों से भी डिलीवरी होती है।
सीमाक्षी का उद्देश्य अपने काम के जरिए महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। वह चाहती हैं कि महिलाएँ अपने घर से ही आर्ट और क्राफ्ट का काम शुरू करें और आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने जबलपुर में कई फ्री वर्कशॉप आयोजित की हैं, जहाँ वह महिलाओं को आर्ट और क्राफ्ट सिखाती हैं। सीमाक्षी का मानना है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें महिलाएँ घर बैठे काम कर सकती हैं और अपने कौशल का उपयोग करके आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। उनके इस प्रयास ने न केवल उनके जीवन को बदला है, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा दी है।

भोपाल की ऋचा जैन, जो “फ़ितूर बाय ऋचा” की फाउंडर हैं, ने COVID-19 लॉकडाउन के दौरान अपनी क्रिएटिविटी को फिर से खोजा और इसे एक सफल स्टार्टअप में बदल दिया। शादी के बाद व्यस्तता के कारण अपनी कला से दूर हो चुकी ऋचा ने लॉकडाउन के खाली समय का उपयोग कर रेसिन आर्ट की बारीकियाँ ऑनलाइन सीखीं। रेसिन आर्ट एक अनूठा तरीका है, जिसमें यादों को सहेजने वाले आइटम्स जैसे शादी की वरमाला, बेबी की प्रेग्नेंसी डीटेल्स, और एम्बिलिकल कॉर्ड को सुंदर फ्रेम्स में प्रिज़र्व किया जाता है। यह न केवल उन पलों को सहेजने का काम करता है, बल्कि इंटीरियर डेकोरेशन का भी हिस्सा बनता है।
ऋचा का कहना है कि शादी की वरमाला को प्रिज़र्व करने का ट्रेंड आजकल काफी लोकप्रिय हो गया है, क्योंकि वरमाला हर शादी का एक खास हिस्सा होती है। फूलों को रेसिन आर्ट के जरिए ड्राई करके संरक्षित किया जाता है, जिससे वे हमेशा ताजगी बनाए रखते हैं। यह कला शादी के सीजन में बेहद डिमांड में रहती है। ऋचा के मुताबिक, एक फ्रेम तैयार करने में लगभग 15-20 दिन लगते हैं। उनके द्वारा बनाए गए वॉल पीस, फोटो फ्रेम्स, और अन्य इंटीरियर आइटम्स को ग्राहकों से शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है।
अपने स्टार्टअप को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ाने के लिए ऋचा ने अपनी ग्राफिक्स और डिजिटल मार्केटिंग स्किल्स का बखूबी इस्तेमाल किया। इंस्टाग्राम पर “फ़ितूर बाय ऋचा” के नाम से उनका पेज है, जहां से उन्हें ग्राहक मिलते हैं। उनकी मुख्य मार्केटिंग स्ट्रेटेजी ग्राहकों से मिली प्रशंसा और वर्ड-ऑफ-माउथ पर आधारित है। ऋचा ने बच्चों और युवाओं को आर्ट में शामिल करने के लिए वर्कशॉप्स और आर्ट पार्टीज भी शुरू की हैं। उनकी योजना रेसिन आर्ट को और बड़े स्तर पर ले जाने और हर आयु वर्ग के लोगों को इससे जोड़ने की है, जिससे यह कला और अधिक प्रचलित हो सके।
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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी
जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।
बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।




