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महिला सुरक्षा पर चर्चा: सामूहिक जिम्मेदारी और त्वरित कार्रवाई से बनेगा सुरक्षित समाज

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नई दिल्ली। महिला सुरक्षा पर जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए DB न्यूज़ नेटवर्क से चर्चा में इन महिलाओं ने मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने राज्य को महिलाओं के लिए सुरक्षित बताया और कहा कि पुलिस प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है, जिससे महिलाएं निडर होकर काम कर सकती हैं। हालांकि, महिलाओं ने समाज में अपराधों पर रोकथाम के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपराध के खिलाफ आवाज उठाएं और सरकार के साथ सहयोग करें, ताकि एक सुरक्षित और समृद्ध समाज की नींव रखी जा सके।

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भोपाल, मध्य प्रदेश: दिव्या अत्री, एक सोशल एक्टिविस्ट और विजन डेवलपमेंट फॉर विमेन वेलफेयर नीड्स सोसाइटी की प्रेसिडेंट, ने डीबी न्यूज़ नेटवर्क के साथ एक विशेष बातचीत में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर कई अहम मुद्दों पर अपनी राय साझा की। दिव्या ने बताया कि उनके संगठन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों के विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए रोजगार योजनाओं और लोन की सुविधाओं से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

दिव्या ने मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे अनिवार्य करने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज भोपाल के प्रमुख चौराहों और मंदिरों में कैमरे लगने से महिलाओं को सुरक्षा का एहसास होता है। पुलिस गश्त भी पहले से अधिक सक्रिय हो गई है, जिससे महिलाएं रात में भी सुरक्षित महसूस करती हैं।” उन्होंने ग्रामीण इलाकों में पुलिस की सजगता और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। दिव्या ने बताया कि गांवों में अपराधों के बढ़ने का कारण पुलिस और प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया है, जिससे लोगों का कानून पर विश्वास कम हो जाता है।

महिला सशक्तिकरण की बात करते हुए दिव्या ने बताया कि उनके संगठन ने कई महिलाओं और बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया, “हमने बच्चों को शिक्षित करने और महिलाओं को स्किल्स सिखाने का अभियान चलाया है। चाहे पार्लर ट्रेनिंग हो, सिलाई हो या अन्य छोटे काम, महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो रही हैं। इसके साथ ही, हमने स्वच्छता अभियान और पर्यावरण को लेकर भी लोगों को जागरूक किया है।” दिव्या ने नागरिक जागरूकता और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भोपाल को “मध्य प्रदेश की धड़कन” के रूप में बनाए रखने के लिए हर नागरिक और प्रशासन का सक्रिय योगदान आवश्यक है।

भोपाल, मध्य प्रदेश : प्रिया बारडे – को-फाउंडर रेंट योर रनवे ने डीबी न्यूज़ नेटवर्क के साथ एक साक्षात्कार में महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार के अवसर और पुलिस प्रशासन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि उन्हें भोपाल में कभी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। रात के समय सफर करने से लेकर सार्वजनिक परिवहन के उपयोग तक, भोपाल उन्हें और उनकी सहेलियों को हमेशा सुरक्षित लगा है। प्रिया का मानना है कि शहर में महिला अपराध के मामलों में कमी आई है और महिलाएं अब अधिक आत्मनिर्भर और जागरूक हो गई हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहती हैं, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

रोजगार के अवसरों पर चर्चा करते हुए, प्रिया ने कहा कि भोपाल में औद्योगिक हब और निजी कंपनियों की कमी के कारण रोजगार के साधन सीमित हैं। उन्होंने इंदौर की तुलना में भोपाल में रोजगार की कमी को रेखांकित करते हुए सुझाव दिया कि शहर में प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं, और वे प्राइवेट, गवर्नमेंट, और सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। प्रिया ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भोपाल में रोजगार के साधन और सैलरी ग्रोथ में सुधार होगा।

पुलिस प्रशासन और महिला सुरक्षा पर बोलते हुए प्रिया ने कहा कि उनका अनुभव अब तक सकारात्मक रहा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को पुलिस थानों में अपनी शिकायतें दर्ज कराने में झिझक नहीं होनी चाहिए और प्रशासन को इस मामले में और अधिक संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है। प्रिया ने कहा, “पुलिस पर भरोसा कायम है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।” उन्होंने समाज और प्रशासन से महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रयास करने की अपील की।

भोपाल, मध्य प्रदेश: कॉस्मेटोलॉजिस्ट ताशा दीक्षित ने महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से पहले के मुकाबले सुधार जरूर हुआ है, लेकिन रात में 10-11 बजे के बाद अकेले बाहर निकलने से पहले सोचने की जरूरत होती है। ताशा का मानना है कि पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने और तत्काल कार्रवाई के ज़रिए महिलाओं के प्रति अपराधों को और अधिक नियंत्रित किया जा सकता है। उनका कहना है कि टीम के साथ काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। हालांकि, वह मानती हैं कि स्थिति बेहतर हो रही है और अधिक सुधार से यह और भी सकारात्मक बन सकती है।

रोजगार के संदर्भ में ताशा ने कहा कि महिलाओं में काम करने की रुचि और अवसर दोनों पहले की तुलना में काफी बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि अब महिलाओं को अपने परिवार से अधिक समर्थन मिल रहा है, जिससे वे स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। रोजगार के प्रति महिलाओं की बढ़ती रुचि को समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत मानते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

महिलाओं की सुरक्षा में सुधार के लिए ताशा ने कानून और पुलिस प्रशासन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए लड़कों को बचपन से ही बेहतर संस्कार और शिक्षा दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि घर से ही इसकी शुरुआत होनी चाहिए, और पुरुष वर्ग को महिलाओं की बराबरी और सम्मान का पाठ सिखाना चाहिए। ताशा ने पुलिस प्रशासन से कड़ी कार्रवाई करने और अपराधियों के बीच कानून का डर पैदा करने का आह्वान किया। उनका संदेश है कि समाज में बेहतर परिवेश और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश: निजी विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर विधु गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में उनके सम्मान को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बच्चों के संस्कार और पारिवारिक परिवेश समाज में उनके व्यवहार को आकार देते हैं। प्रोफेसर गुप्ता ने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा की शुरुआत घर से होती है। यदि माता-पिता अपने बच्चों को सही दिशा में संस्कार देंगे, तो वही व्यवहार समाज में परिलक्षित होगा। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को घर में सम्मान मिलता है, तो उन्हें समाज में भी सम्मान प्राप्त होता है।

महिला जागरूकता पर चर्चा करते हुए प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि शिक्षा और सोशल मीडिया का महिलाओं के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। आज की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति अधिक सतर्क और जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों और हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी ने महिलाओं को साहस और सुरक्षा प्रदान की है। प्रोफेसर गुप्ता ने यह भी साझा किया कि सोशल मीडिया ने महिलाओं को सकारात्मक रूप से जुड़ने और सतर्क रहने का एक मंच दिया है। उन्होंने अपने छात्रों और जानने वालों को सुरक्षा के उपायों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी, जैसे हेल्पलाइन नंबर सेव करना और यात्रा के दौरान सतर्क रहना।

महिला सुरक्षा में सुधार के लिए उन्होंने पुलिस प्रशासन को और अधिक सजग होने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि अपराधियों को कठोर दंड देना चाहिए ताकि अन्य असामाजिक तत्वों को ऐसा अपराध करने से डर लगे। उन्होंने सुझाव दिया कि अपराधियों की पहचान को रद्द कर, उनके अधिकारों को निलंबित करना और कड़ी सजा देना आवश्यक है। गुप्ता ने उम्मीद जताई कि सख्त कानूनों और जागरूकता अभियानों के ज़रिए महिलाओं की सुरक्षा में सुधार होगा और समाज में एक सकारात्मक बदलाव आएगा।

भोपाल, मध्य प्रदेश: एंटरप्रेन्योर सुरभि जैन ने महिला सुरक्षा को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश महिलाओं के लिए एक सुरक्षित राज्य है। खुद एक वर्किंग वुमन होने के नाते, उन्होंने बताया कि कई बार रात में अपने काम से लौटने पर भी उन्हें कभी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए सुरभि ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए व्यवस्था काफी मजबूत है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपराध हर जगह होते हैं और इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सुरभि ने कहा कि अपराध की घटनाओं पर काबू पाने के लिए समाज को भी आगे आना होगा। अक्सर लोग बदनामी के डर से पुलिस शिकायत दर्ज कराने से कतराते हैं, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने जोर दिया कि यदि लोग खुलकर अपराध के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो अपराध की घटनाओं में कमी आएगी। सुरभि ने समाज को अपनी जिम्मेदारियां निभाने और पुलिस तथा प्रशासन को सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक जागरूक और सक्रिय समाज ही महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बना सकता है।

सुरभि ने आगे कहा कि नागरिकों को सरकार पर पूरी जिम्मेदारी डालने की बजाय अपनी भूमिका भी समझनी चाहिए। उन्होंने बताया कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अन्य समस्याओं को रोकने के लिए नागरिकों को सक्रिय रूप से कदम उठाने चाहिए। यह सोचकर कि हम सभी की जिम्मेदारी है, महिला सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। सुरभि ने यह भी कहा कि यदि हर नागरिक अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाएगा, तो समाज में अपराध कम होंगे और नगर का विकास तेज़ी से होगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।

बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।