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राहुल बोले- छात्र की आत्महत्या दिल दहलाने वाली, परिजनों का आरोप

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नई दिल्ली। राहुल गांधी ने कहा, मिहिर अहमद की दुखद मौत से उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। किसी भी बच्चे को वह नहीं सहना चाहिए, जो मिहिर ने झेला। स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान होना चाहिए, फिर भी मिहिर को लगातार यातनाएं सहनी पड़ीं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को केरल के एक स्कूल में बलपूर्वक परेशान किए जाने के कारण एक छात्र के आत्महत्या कर लेने की दुखद घटना दिल दहला देने वाली है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मिहिर अहमद की दुखद मौत से उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। किसी भी बच्चे को वह नहीं सहना चाहिए, जो मिहिर ने झेला। स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान होना चाहिए, फिर भी मिहिर को लगातार यातनाएं सहनी पड़ीं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों (प्रताड़ित करने वालों और कार्रवाई करने में विफल रहने वालों) को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’

माता-पिता को बच्चों को बोलने के साहस की सीख देनी चाहिए: राहुल
राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘प्रताड़ना नुकसानदेह है, यह जीवन को नष्ट कर देती है। माता-पिता को अपने बच्चों को दया, प्रेम, सहानुभूति और बोलने के साहस की सीख देनी चाहिए। अगर आपका बच्चा कहता है कि उसे धमकाया जा रहा है, तो उस पर विश्वास करें और अगर वह खुद धमका रहा है, तो हस्तक्षेप करें।

मंत्री ने डीजीआई को जांच के निर्देश दिए
केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने शुक्रवार को सामान्य शिक्षा निदेशक (डीजीई) को 15 जनवरी को छात्र की कथित आत्महत्या के मामले में व्यापक जांच करने का निर्देश दिया, जिसके बारे में उसके परिवार का दावा है कि कोच्चि के निकट उसके स्कूल में रैगिंग के कारण छात्र ने जान दे दी।

आवश्यक होने पर कानून में संशोधन पर विचार किया जाएगा: शिवनकुट्टी
शिवनकुट्टी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘यदि किसी भी स्कूल में हानिकारक गतिविधियां हो रही हैं, चाहे वह किसी भी स्ट्रीम का क्यों न हो, तो उसकी पहचान की जाएगी, उसे रोका जाएगा और संस्थान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो कानून में संशोधन पर भी विचार किया जाएगा।

घटना बेहद दुखद है, पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी: शिवनकुट्टी
मामले का जिक्र करते हुए शिवनकुट्टी ने कहा, ‘एक मां ने आरोप लगाया है कि एर्नाकुलम जिले के थिरुवनीयूर में एक सीबीएसई स्कूल में उसके बेटे को बुरी तरह प्रताड़ित किए जाने के बाद उसने आत्महत्या कर ली। यह घटना बेहद दुखद और चौंकाने वाली है। पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी।’

नौवीं कक्षा का छात्र था मृतक मिहिर
मृतक मिहिर नौवीं कक्षा का छात्र था, जिसने त्रिपुनिथुरा स्थित अपने फ्लैट से कूदकर जान दे दी। इसके बाद उसकी मां ने मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस प्रमुख के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि स्कूल में रैगिंग के कारण उसके बेटे ने आत्महत्या कर ली। मां की शिकायत के अनुसार, बेटे के दोस्तों से मिली जानकारी और सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से पता चला है कि उसके साथ कथित तौर पर रैगिंग और शारीरिक उत्पीड़न किया गया था।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।