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क्या दिल्ली को मिलेगी महिला मुख्यमंत्री? रेस में चार नाम, जानें इसकी सच्चाई

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नई दिल्ली। सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी के बाद दिल्ली को एक बार फिर महिला
मुख्यमंत्री मिल सकती है। महिलाओं के सम्मान व सुरक्षा के वादे के साथ 27 साल बाद सत्ता में आई भाजपा किसी महिला विधायक को सरकार का नेतृत्व सौंपने को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली के दौरान महिलाओं से वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले ही उनके खाते में ढाई हजार रुपये आ जाएंगे।

पीएम मोदी के आने के बाद होगा अंतिम निर्णय
सूत्रों के अनुसार पीएम के इस वादे को भाजपा महिला सीएम के हाथों पूरा करा सकती है। इस बीच सीएम पद की दौड़ में शामिल विधायक अपनी-अपनी कोशिशों में लगे हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री के अमेरिका से लौटने के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय होगा। दिल्ली में किसी महिला विधायक को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे एक आधार यह भी है कि अभी भाजपा शासित किसी भी राज्य में महिला मुख्यमंत्री नहीं है।

इन चार महिलाओं के नाम रेस में
वहीं, ऐसे में पार्टी देश की राजधानी में महिला को मुख्यमंत्री बनाकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले नारी सशक्तीकरण का संदेश भी देना चाहती है। इस चुनाव में भाजपा की चार महिला विधायक चुनकर आई हैं। इनमें शालीमार बाग सीट से रेखा गुप्ता, ग्रेटर कैलाश से शिखा राय, वजीरपुर से पूनम शर्मा और नजफगढ़ से नीलम पहलवान विधायक चुनी गईं हैं।

रेखा गुप्ता दिल्ली प्रदेश भाजपा में महामंत्री रह चुकी हैं। इस समय महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वह वर्ष 2022 में नगर निगम पार्षद चुनी गई थीं। वहीं, शिखा राय ने ग्रेटर कैलाश से आप के वरिष्ठ नेता व मंत्री सौरभ भारद्वाज को पराजित किया है। वह दो बार की पार्षद हैं। ऐसे में रेखा व शिखा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। अगर ऐसा होता है तो एक महिला मुख्यमंत्री के हटने पर उसके स्थान पर दूसरी महिला मुख्यमंत्री पदभार ग्रहण करेगी।

बता दें, आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद आम आदमी पार्टी ने आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया था। इससे पहले 10 वर्षों तक कांग्रेस के शासनकाल में शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं। शीला से पहले भाजपा के कार्यकाल में कुछ माह के लिए सुषमा स्वराज भी दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं।

बैठक में क्या निष्कर्ष निकला
वहीं, दिल्ली में सोमवार को ऊपरी तौर पर सियासी सन्नाटा ही रहा, जिसे अटकलें चीरती रहीं। भाजपा नेताओं का कहना है कि रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई थी। इसमें सीएम के चेहरे को लेकर चर्चा होने का अनुमान है। हालांकि, बैठक में क्या निष्कर्ष निकला, किसके नाम पर मुहर लगी, यह अभी रहस्य ही बना है।

चुनाव में अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा भी मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार हैं। चुनाव परिणाम आने के कुछ देर बाद ही वह अमित शाह से मिले थे। रविवार को उन्होंने एवं नवनिर्वाचित विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। रविवार देर शाम राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की थी।

वहीं, सोमवार को विधायकों से मिलने की जगह टेलीफोन के माध्यम से वरिष्ठ नेताओं ने उनसे बात की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों से भी इस बारे में राय ली जा रही है। वहीं, दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने सभी सांसदों व नवनिर्वाचित विधायकों के साथ उपराज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा है। उन्होंने रविवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है, लेकिन सोमवार को भी मुलाकात नहीं हुई है। बताते हैं कि अगले एक-दो दिन में मुलाकात हो सकती है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।