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ट्रंप ने प्रस्तावित 50% टैरिफ जुलाई तक टाला, हार्वर्ड विवि अनुदान के मसले पर भी बोले

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नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (ईयू) से आने वाले सामान पर प्रस्तावित 50 फीसदी आयात शुल्क (टैरिफ) 1 जून से आगे बढ़ाकर अब 9 जुलाई तक टाल दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ईयू के साथ वार्ता के लिए अधिक समय देने के मकसद से लिया गया है। इससे पहले, ट्रंप ने रविवार को यूरोपीय आयोग के प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन से फोन पर बात की। इस बातचीत में यह सहमति बनी।

ट्रंप के मुताबिक , वॉन डेर लेने ने उनसे कहा कि वह गंभीरता से वार्ता शुरू करना चाहती हैं। न्यू जर्सी के मॉरिस्टाउन में मीडिया से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, मैंने पहले भी कहा था कि उन्हें (ईयू) ऐसा करना होगा। उन्होंने बताया कि वॉन डेर लेयेन ने जल्द मिलने और समाधान निकालने की बात कही है।

इससे पहले, ट्रंप ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में चेतावनी दी थी कि अगर ईयू ने सहयोग नहीं किया तो अमेरिका एक जून से 50 फीसदी टैरिफ लगाएगा। उन्होंने ईयू को व्यापार के मामले में बहुत कठिन बताया था और कहा था कि वार्ता कहीं नहीं जा रही है। हालांकि, रविवार को फोन पर बातचीत के बाद माहौल बदला। इसके बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, मैंने टैरिफ की तारीख 9 जुलाई, 2025 तक बढ़ाने पर सहमति दी है। यह मेरे लिए संतोषजनक रहा।

उधर, वॉन डेर लेयेन ने कहा, ईयू और अमेरिका के बीच दुनिया का सबसे अहम और करीबी व्यापारिक संबंध हैं। यूरोप तेजी से ठोस तरीके से वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि एक अच्छा समझौता करने के लिए हमें नौ जुलाई तक का वक्त चाहिए।

हार्वर्ड (विश्वविद्यालय) की समस्या का एक हिस्सा यह है कि वहां करीब 31 फीसदी विदेशी छात्र पढ़ते हैं। हम उन्हें (हार्वर्ड) अरबों डॉलर देते हैं, जो कि बेवकूफी है। हम उन्हें अनुदान देते हैं, लेकिन शायद अब हम हार्वर्ड को ज्यादा अनुदान नहीं देंगे। वहां 31 फीसदी (विदेशी छात्र) हैं, लेकिन वह हमें यह नहीं बताते कि वे कौन लोग हैं। हम यह जानना चाहते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, बहुत से विदेशी छात्रों से हमें कोई दिक्कत नहीं होगी। मुझे विदेशी छात्रों से दिक्कत नहीं है। लेकिन यह 31 फीसदी नहीं होने चाहिए। यह ज्यादा है,क्योंकि हमारे अमेरिकी छात्र भी वहां और दूसरी जगहों पर जाना चाहते हैं, लेकिन नहीं जा पाते। कोई विदेशी सरकार हार्वर्ड को पैसा नहीं देती। हम देते हैं। तो फिर वे इतने विदेशी छात्र क्यों ले रहे हैं। दूसरा, हम उन विदेशी छात्रों की सूची चाहते हैं और हम पता लगाएंगे कि वे ठीक हैं या नहीं। मैं मानता हूं कि हार्वर्ड में बहुत से छात्र ठीक होंगे और बहुत से खराब भी होंगे। और एक और बात कि वे (हार्वर्ड) बहुत ज्यादा यहूदी-विरोधी हैं, हर कोई जानता है कि वह यहूदी-विरोधी हैं और इसे तुरंत बंद होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।