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कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने- सरकार पर बोला हमला

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज पचमढ़ी में शुरू हो रहे पार्टी के महामंथन शिविर से पहले प्रेस वार्ता में प्रदेश की राजनीति और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होने बताया कि पचमढ़ी शिविर में वरिष्ठ नेता, संगठन पदाधिकारी और विभिन्न जिलों के अध्यक्ष शामिल होंगे। इस दौरान संगठन सृजन अभियान की समीक्षा और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

पटवारी ने बताया कि पचमढ़ी में आयोजित दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में नव नियुक्त जिलाध्यक्षों को कांग्रेस की विचारधारा, संगठनात्मक ढांचे और पार्टी की कार्यशैली की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान के बाद यह प्रशिक्षण कांग्रेस को जिला स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

शराबबंदी के मुद्दे पर चिंता जताते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि बीजेपी सरकार ने शराब से 17 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है, जो युवा पीढ़ी को नशे की लत में धकेलने जैसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री के 25 साल के विजन बयान पर तंज कसते हुए पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश आज पांच लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है। कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं बची। बीजेपी के सांसद और विधायक जनता से दुर्व्यवहार कर रहे हैं सतना में बीजेपी सांसद गणेश सिंह ने एक नागरिक को थप्पड़ मारा, यही उनकी संस्कृति है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार 50 प्रतिशत कमीशन की सरकार बन चुकी है। पटवारी ने कहा कि किसानों को परेशान किया जा रहा है, ओबीसी आरक्षण रोका गया है, 27 विभागों के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा, जबकि मुख्यमंत्री 200 करोड़ रुपये का नया विमान खरीद रहे हैं और उसके रखरखाव पर रोज़ 25 लाख खर्च कर रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के विचारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा हाई कोर्ट परिसर में बाबा साहब की प्रतिमा नहीं लगने के पीछे बीजेपी सरकार की मंशा जिम्मेदार है। यह वही सोच है जो सामाजिक न्याय और संविधान की भावना के खिलाफ है

अपनी सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए पटवारी ने कहा, “कांग्रेस की 55 साल की सरकार में न कमीशनखोरी थी, न जनता पर अत्याचार, न घर-घर शराब पहुंचाई गई, न किसानों को यातनाएं दी गईं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आने वाले समय में जनता के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।