मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वास्तु एक्सपर्ट अमित मिश्रा ने कॉर्पोरेट आईटी करियर छोड़कर वास्तु और ज्योतिष के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्षों की नौकरी के बाद भी जब संतुष्टि नहीं मिली, तो उन्होंने अपने पुराने शौक और पारिवारिक परंपरा से जुड़े वास्तु विज्ञान को ही अपना पेशा बना लिया। आज वे ऊर्जा संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली को लेकर लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
अमित मिश्रा बताते हैं कि आईटी क्षेत्र में अनुभव होने के बावजूद उनके भीतर हमेशा कुछ अलग करने की इच्छा थी। नौकरी स्थिर थी, लेकिन आत्मसंतुष्टि की कमी महसूस होती थी। बचपन से ही उनके परिवार में ज्योतिष और वास्तु को लेकर रुचि रही, इसलिए यह विषय उनके लिए नया नहीं था। कॉर्पोरेट और सेल्स अनुभव का उपयोग करते हुए उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और रेफरल नेटवर्क के माध्यम से अपने काम को आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे इसे प्रोफेशनल रूप दिया।
सरल भाषा में वास्तु को समझाते हुए अमित कहते हैं कि हमारा शरीर और ब्रह्मांड पंचतत्व—जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश से बने हैं। जब हमारे आसपास का वातावरण इन तत्वों के संतुलन में होता है, तो जीवन में मानसिक शांति, स्वास्थ्य, रिश्ते और समृद्धि बेहतर होती है। लेकिन यदि यह संतुलन बिगड़ जाए, तो तनाव, बीमारी या अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। उनके अनुसार, वास्तु शास्त्र ऊर्जा के सही चयन और संतुलन का विज्ञान है, जो व्यक्ति और स्थान के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।
अमित मिश्रा यह भी स्पष्ट करते हैं कि वास्तु सुधार के लिए हमेशा तोड़फोड़ जरूरी नहीं होती। कई मामलों में रंग संयोजन, वस्तुओं की दिशा, धातु या प्राकृतिक तत्वों के प्रयोग जैसे उपायों से सुधार संभव है। हालांकि, कुछ गंभीर स्थितियों में संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। वे मानते हैं कि वास्तु सुधार एक प्रक्रिया है, जिसका प्रभाव धीरे-धीरे जीवन में सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखाई देता है।





