मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पीआरटी इंग्लिश शिक्षक सारिका कालकर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कॉर्पोरेट करियर के बाद उन्होंने अपने जीवन में एक नया मोड़ लिया और शिक्षा के क्षेत्र को अपनाया। बैंगलोर और चेन्नई में काम करने के दौरान उन्होंने अपने छोटे बेटे की देखभाल के लिए करियर से ब्रेक लिया, लेकिन इसी दौरान उन्हें पढ़ाने के प्रति अपने लगाव का एहसास हुआ। बेटे को घर पर पढ़ाते-पढ़ाते उन्होंने महसूस किया कि शिक्षण उनके लिए सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक जुनून है।
सारिका कालकर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि वे एक सफल शिक्षक बन सकती हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन और अपने अनुभवों से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का हौसला दिया। उन्होंने न केवल अपने बेटे को पढ़ाया बल्कि आसपास के बच्चों को भी शिक्षा दी और फिर औपचारिक रूप से स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। उन्होंने अपने ज्ञान को और मजबूत करने के लिए बीएड की पढ़ाई भी की और आज वे प्राइमरी छात्रों को पढ़ाते हुए इस क्षेत्र में संतोष और खुशी महसूस करती हैं।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए बताया कि छात्रों के विकास में शिक्षक, अभिभावक और स्कूल तीनों की साझेदारी बेहद जरूरी है। सारिका के अनुसार, पैरेंट-टीचर मीटिंग्स बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं और शिक्षा को बेहतर बनाती हैं। साथ ही उन्होंने डिजिटल युग में बच्चों के लिए संतुलित जीवनशैली की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पढ़ाई, खेल और स्क्रीन टाइम के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, जिसमें अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम होती है।





