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IYC महासचिव रक्षा का केंद्र सरकार पर हमला, बोले – बीजेपी दिखावे की पॉलिटिक्स करती है

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संसद सुरक्षा, किसानों, युवाओं के बारे में बात करो तो सस्पेंड करेंगे, पब्लिक इंटरेस्ट इश्यू पर चर्चा से बचना चाहती है बीजेपी

नई दिल्ली। भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव रक्षा रमैया ने संसद में हुई चूक और सांसदों के निलंबन को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। डीबी न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव रक्षा रमैया ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि संसद सुरक्षा में चूक केंद्र की बड़ी लापरवाही रही, अब असल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए सांसदों का निलंबन किया जा रहा है।

संसद सुरक्षा चूक पर सवाल करने पर निलंबन

भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव ने कहा है कि यह मर्डर ऑफ़ डेमोक्रेसी है। जो भी विपक्षी सांसद आपसे संसद सुरक्षा में हुई चूक को लेकर सवाल करेगा उसे आप सस्पेंड कर देंगे? केंद्र सरकार से अडानी के बारे में बात करो तो सस्पेंड करेंगे, किसानों के बारे में बात करो तो सस्पेंड करेंगे। सरकार को जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचने का एक बहाना चाहिए। उन्होंने कहा जनता इनके बारे में सब जान चुकी है। हमारा भारत जीडीपी में पीछे जा चुका है। पहले तो हम यूरोप, सिंगापुर और हांगकांग से कंपेयर करते थे। अब इनका जो मैनेजमेंट है वह बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे जा चुका है। इनका जो एजेंडा है वह बिल्कुल नॉन प्रोसेस एजेंडा है। बीजेपी के लोग केवल स्वयं और स्वयं के नेताओं का डेवलपमेंट करते हैं।

डेवलपमेंट बीजेपी का कभी एजेंडा ही नहीं रहा

भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव ने कहा कि इस के खिलाफ हम कर्नाटक में भी आज एक प्रोटेस्ट कर रहे हैं। जब तक संसद सदस्यों की बहाली नहीं होती तब तक हम यह प्रोटेस्ट जारी रखेंगे। अगर संसद में सदस्य ही नहीं होंगे तो पब्लिक इंटरेस्ट इश्यू पर चर्चा कैसे होगी। वह 2014 में तो बोलते थे कि 15 लाख देंगे सबको पर अब हर इंडियन के ऊपर 2 लाख का लोन बन चुका है। इंडियन इकोनॉमी लगातार गिर रही है। असल में डेवलपमेंट बीजेपी का कभी एजेंडा ही नहीं रहा, वह सिर्फ धर्म की राजनीति करते हैं।

दरअसल, 13 दिसंबर को संसद पर हमले की 22वीं बरसी के दिन लोकसभा की दर्शक दीर्घा से दो युवक सदन में कूद गए थे। जिस वक्त यह घटना हुई उस वक्त सदन की कार्रवाई चल रही थी। सांसदों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया था और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। संसद की सुरक्षा में सेंध को लेकर विपक्षी दल प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं। यहां बता दें कि संसद से अब तक 146 सांसदों के निलंबन को कार्यवाई की गई है, जिसके खिलाफ आज देश भर में कांग्रेस नेता और विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।