नई दिल्ली। भारतीय महिलाओं की पहचान साड़ी आज पूरे विश्व में विख्यात है। पूरी दुनिया इसकी दीवानी है। पारंपरिक परिधान के रुप में सदियों से चली आ रही साड़ी की आज भी पहचान कायम है। कहा जाता है की साड़ी भारतीय महिला कि पहचान है, उनका अभिमान है। जहां तक साड़ी के कम चलन का सवाल है, हां वर्तमान में थोड़ा कम हुआ है। परन्तु आज भी भारत में बहुत सी महिलायें हैं जो साड़ी के अलावा कोई और परिधान नहीं पहनती हैं। महिलाओं में साड़ी पहनने का क्रेज बड़े इसी उद्देश्य के साथ मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में 6 वर्ष पूर्व रिचा शिवहरे द्वारा सारी नॉट सॉरी ग्रुप की शुरुवात की गई।

रिचा ने कहा की साड़ी का महत्व हमारे कल्चर में घटता जा रहा था। जिसके चलते सारी नॉट सॉरी की शुरुआत की गई। आज के समय में प्रैक्टिकल तरीके से हम किसी भी बात को ज्यादा बेहतर समझा सकते हैं। सारी नॉट सॉरी की शुरुआत एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हुई थी, जिसमें महिलाओं को जोड़ा गया। अगर लोगों को हैंडलूम के बारे में बताना हो तो उसे किसी इवेंट से जोड़कर प्रैक्टिकल तरीके से दिखाया जा सकता है। इस ग्रुप में हमने कई प्रोजेक्ट किए हैं। और छोटे-छोटे इवेंट अलग-अलग राज्यों में किए। जिससे साड़ियों का क्रेज़ अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। आज के समय में हैंडलूम कहीं ना कहीं जरूरी हैं, क्योंकि इससे कई लोगों का रोजगार जुड़ा रहता है।
शुरुआत का समय मैंने अकेले संभाला, फिर मैंने एक टीम बनाई, मैंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके इस ग्रुप को बनाया। जो महिलाएं साड़ी से प्यार करती हैं, वे इस ग्रुप में आ सकती हैं। सोशल मीडिया पर मैसेज के जरिए 99 मेंबर पहले ही आ चुके थे। यह एक यूनिक कॉन्सेप्ट था और ग्वालियर में ऐसा कोई और ग्रुप नहीं था। वर्तमान में इस ग्रुप में 150 सदस्य हैं। मेरा उद्देश्य साड़ी के प्रति जागरूकता फैलाना था, जो अब पूरा होता दिखाई दे रहा है।

सारी नॉट सॉरी की बीओडी डॉ प्रतिभा शर्मा ने कहा कि मैं शुरुआत से ही सारी नॉट सॉरी ग्रुप से जुड़ी हूं। इस ग्रुप को 6 साल पूरे हो गए हैं। जब हमने यह ग्रुप शुरू किया था, तो हमारा मुख्य उद्देश्य साड़ी को प्रमोट करना था। हमारे समाज में लोग साड़ी पहनना भूल गए थे।
हमने इस बात पर भी फोकस किया कि ग्वालियर के जो भी हेरिटेज प्लेसेज हैं, उन्हें कवर करें और उनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लोगों को दे सकें। हमें इस कार्य में।कई महिलाएं सहयोग कर रही हैं। आगे भी हम कुछ नया और अच्छा करते रहेंगे, जो समाज के लिए भी लाभदायक रहेगा।

सारी नॉट सॉरी की बीओडी करिश्मा जैन ने कहा कि मैं सारी नॉट सॉरी से 6 साल से जुड़ी हुई हूं। मुझे बहुत गर्व महसूस होता है कि इंडियन कल्चर फिर से लौट कर आ रहा है और महिलाएं साड़ी को फिर से पहनने लगी हैं। पूरे विश्व में भारतीय साड़ी की अलग पहचान है, जो हमेशा कायम रहेगी। हमें इस बात का गर्व है।





