db News Network

Home » वायनाड से चुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी

वायनाड से चुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी

0 comments 86 views 2 minutes read

नई दिल्ली। प्रियंका गांधी केरल की वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका को प्रत्याशी बनाने की औपचारिक घोषणा कर दी है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रियंका को प्रत्याशी बनाए जाने का एलान किया। बता दें कि प्रियंका खुद भी वायनाड से पार्टी का प्रतिनिधित्व करने को लेकर हामी भर चुकी हैं। विगत जून महीने में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे की घोषणा के बाद प्रियंका ने कहा था कि यहां से चुनाव लड़ना उनका सौभाग्य होगा।

वायनाड से निर्वाचित होने पर प्रियंका पहली बार किसी सदन की सदस्य बनेंगी। वह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सक्रिय राजनीति में उतरी थीं। उसके बाद से वह पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी निभा रही हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा वायनाड लोकसभा उपचुनाव की घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी वाली सूची जारी की।

उन्होंने चुनाव लड़ने वाले तीन प्रत्याशियों की सूची जारी की। कांग्रेस पार्टी के बयान के मुताबिक लोकसभा उपचुनाव में वायनाड से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी, जबकि केरल की ही दो खाली विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में पलक्कड़ सीट पर राहुल ममकुताथिल चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित चेल्लाकरा विधानसभा सीट से पार्टी ने महिला नेता राम्या हरिदास को उम्मीदवार बनाया है।

चुनाव जीतते ही प्रियंका के नाम होगी खास उपलब्धि
दिलचस्प तथ्य है कि अगर प्रियंका गांधी लोकसभा चुनाव जीतती हैं, तो वह मौजूदा संसद में गांधी परिवार से तीसरी सांसद होंगी। भाई राहुल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, जबकि मां सोनिया गांधी राज्यसभा की सदस्य हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसी साल जून में घोषणा की थी कि गांधी परिवार की पारंपरिक सीट रायबरेली को राहुल गांधी बरकरार रखेंगे। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी के वायनाड सीट खाली करने के बाद कांग्रेस इस लोकसभा सीट से प्रियंका गांधी को मैदान में उतारेगी। इस मौके पर मौजूद रहे राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी के जीतने का भरोसा जताते हुए कहा था कि अब रायबरेली और वायनाड दोनों को दो-दो सांसद मिलेंगे। राहुल गांधी ने 2019 और 2024 में वायनाड से लोकसभा चुनाव जीता था। अब वह लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं।

इसी बीच केरल भाजपा अध्यक्ष के. सुरेन्द्रन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। उन्होंने पलक्कड़ विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की तारीख 20 नवंबर करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि 13 नवंबर को कल्पती रथोत्सवम रथ उत्सव की शुरुआत होने के कारण मतदान की तारीख को आगे खिसकाया जाए।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।