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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना

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नई दिल्ली। किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी न मिलने पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही जैविक प्रधानमंत्री की नीतियां किसान विरोधी रही हैं। ना तो पर्याप्त खरीदी हो रही है, न उचित दाम मिल रहा है और न ही एमएसपी की कानूनी गारंटी मिल रही है। किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है।

उन्होंने कांग्रेस के मीडिया समन्वयक अभय दुबे का बयान साझा किया। अभय दुबे ने बयान दिया है कि मोदी सरकार पिछले 10 साल से किसानों के साथ गलत व्यवहार कर रही है। इससे साफ है कि नरेंद्र मोदी किसान विरोधी हैं। हमारी मांग है कि किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल का समर्थन मूल्य कम से कम 6000 रुपये तय किया जाए।

कांग्रेस नेता अभय दुबे ने कहा कि अगर सोयाबीन का समर्थन मूल्य 6,000 रुपये तय किया जाता है, तो अंतर की राशि उन किसानों के खातों में भी जमा की जानी चाहिए, जिन्होंने पहले ही अपनी फसल कम दाम में बेच दी है। पीएम मोदी को समर्थन मूल्य घोषित करने की औपचारिकता पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने पीएम मोदी के कुछ फैसले गिनाए। अभय दुबे ने कहा कि सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने जून 2014 में किसानों को समर्थन मूल्य के ऊपर दिया जाने वाला 150 रुपये का बोनस बंद करा दिया। दूसरे निर्णय में एक के बाद एक किसानों की जमीनों के उचित मुआवजा कानून को खत्म करने वाले तीन अध्यादेश लाए गए। तीसरे फैसले में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि किसानों को लागत के 50 फीसदी से ऊपर समर्थन मूल्य नहीं दिया जा सकता, नहीं तो बाजार खराब हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर किसान विरोधी अन्य आरोप भी लगाए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि 2022 में महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिराने के लिए भाजपा ने खुली खरीद फरोख्त के जरिये कितना चंदा लिया था? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा ने महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिराने के लिए अविभाजित शिवसेना और एनसीपी के विधायकों की खरीद की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि महायुति ने महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर दिया है। हम जानते हैं कि इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाले में चार लाख करोड़ रुपये का खेल हुआ है और इससे महाराष्ट्र के खजाने को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सवाल यह है कि महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिराने में चंदे का कितना पैसा लगा?

उन्होंने कहा कि कल सामने आया कि महायुति ने चुनावी चंदे के बदले में टेंडर के लिए अधिक पैसे दिए। 10 हज़ार करोड़ रुपये महाराष्ट्र के सरकारी खजाने से निकालकर कंपनियों को दिए गए। महायुति का गठन और उसका सरकार बनाना सत्ता के प्रति उसके लालच और लोकतांत्रिक मूल्यों की उपेक्षा का प्रमाण है। गलत तरीके से प्राप्त ऐसे इलेक्टोरल बॉन्ड के पैसे से शिवसेना और एनसीपी विधायकों की खुली खरीद-फरोख्त हुई।

जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि रिश्वतखोरी के अलावा विधायकों और नेताओं को महायुति में शामिल होने के लिए मजबूर करने के लिए ED/CBI/IT को भी लगाया गया। इसका प्रमाण स्वयं महायुति नेताओं से मिला है। सांसद रवींद्र वायकर ने ही कहा था कि जब वे महाविकास अघाड़ी में थे तब उनके पास दो विकल्प थे – राजनीतिक दल बदलो या जेल जाओ। इससे पहले शु्क्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने 10 हजार करोड़ की लूट कराई है। जयराम रमेश ने पवन खेड़ा की एक्स पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि यह मामला प्रीपेड चंदा (दान) और पोस्टपेड चंदा (व्यापार) से जुड़ा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।