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विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने सम्मेलन में लिया फीडबैक, कार्यकर्ताओं का बढ़ाया मनोबल

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रायपुर। निकाय-पंचायत चुनाव और रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के साथ कांग्रेस भी तैयारियों में जुट गई है। कांग्रेस की ओर से आशीर्वाद भवन में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिमसें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रभारियों से फीडबैक ली गई।

प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और संगठित होकर काम करने का आह्वान किया। कार्यकर्ताओं को इस बार रायपुर दक्षिण से कांग्रेस का विधायक बनाने का संकल्प भी दिलाया गया।

प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है। भाजपा को इस चुनाव से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी के समान है। प्रत्याशी की घोषणा भी हाईकमान जल्द करेगा। उपचुनाव की तैयारी विगत दो महीने से शुरू कर दिया गया था। वार्ड अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि 11 माह में राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था, भाजपा की वायदाखिलाफी, सरकार का कुशासन बड़ा चुनावी मुद्दा होगा। कार्यकर्ताओं को मजबूती और ईमानदारी से मिलकर काम करना है। कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश प्रभारी सचिव एसए संपत कुमार, जरिता लैतफलांग और विजय जांगिड़, सभी 253 बूथों के कार्यकर्ता, पदाधिकारी तथा वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत ने कहा कि मुझे पता है कि कांग्रेस की ओर से उपचुनाव में प्रत्याशी कौन है। वो कांग्रेस का कार्यकर्ता होगा। कांग्रेस इस उपचुनाव को जीतती है, तो पार्टी का मनोबल बढ़ेगा। नगरीय निकाय चुनाव में भी इसका फायदा होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 11 महीने में राज्य सरकार ने कुछ भी कार्य नहीं किया है। प्रदेश में अपराध का ग्राफ बढ़ा है। इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाना है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जो कार्य किया है, उसे लोगों तक पहुंचाना है। कांग्रेस के पार्षदों को आगे आना होगा ताकि उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिल सके।

प्रदेश सह प्रभारी विजय जांगिड़ ने कहा कि प्रदेश में अपराध बढ़ गया है। कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नही है। दक्षिण विधानसभा उपचुनाव मिलकर लड़ेंगे। हमें जरूर सफलता मिलेगी। सरकार के खिलाफ बहुत से मुद्दें हैं, जिन्हें लोगों के बीच लेकर जाना है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।