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कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जारी की दूसरी लिस्ट, इन नामों का एलान

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने भी अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है। इसमें 23 प्रत्याशियों के नाम का एलान किया गया है। इससे पहले कांग्रेस ने गुरुवार को महाराष्ट्र चुनावों के लिए अपनी पहली लिस्ट में 48 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया था। अब दूसरी लिस्ट में 23 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। इस तरह कांग्रेस ने महाराष्ट्र के लिए कुल 71 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है। दूसरी लिस्ट के अनुसार, कांग्रेस ने जलगांव (जमोद) से स्वाति संदीप वाकेकर और भुसावल सीट से डॉ. राजेश तुकाराम मनवंतकार को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

कांग्रेस की दूसरी सूची में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है और सिर्फ जालना सीट पर ही मौजूदा विधायक कैलाश गोरंट्याल को मौका दिया गया है। इस सूची में तीन महिला उम्मीदवारों का नाम है। दूसरी सूची में 23 सीटों में से कई सीटें विदर्भ क्षेत्र की हैं। नागपुर दक्षिण सीट कांग्रेस के खाते में गई है। इस सीट से गिरीश पांडव को पार्टी ने टिकट दिया है। कांग्रेस नेता सुनील केदार की पत्नी अनुजा को नागपुर जिले की सावनेर सीट से चुनाव मैदान में उतरा गया है। सुनील केदार को एक मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें विधायक पद से हटना पड़ा था। उनकी अपील अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। पूर्व मंत्री वसंत पुरके अपनी पारंपरिक रालेगांव सीट से चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस ने मुंबई की तीन सीटों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा की है। कालू बधेलिया कांदिवली ईस्ट से चुनाव लड़ेंगे जहां उनका मुकाबला भाजपा के अतुल भातखलकर से होगा, यशवंत सिंह चारकोप से भाजपा के योगेश सागर से और गणेश यादव सायन कोलीवाड़ा से भाजपा के तमिल सेल्वन से मुकाबला करेंगे। वरिष्ठ पार्टी नेता शिवाजीराव मोघे के बेटे जितेन्द्र अरणी (एसटी) सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं शेखर शेंडे वर्धा से चुनाव लड़ेंगे। भंडारा से पूजा गणेश थावकर, यवतमाल से अनिल बालासाहेब मुंगालकर को टिकट दिया है। जालना से कैलाश किशनराव, वसई से विजय गोविंद पाटिल को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर कृष्णराव बावनकुले के खिलाफ नागपुर जिले के कामठी सीट से यादवराव भोयर को टिकट दिया है।

कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में 25 मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा है। 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और राकांपा एसपी के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही है। राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से तीनों पार्टियों ने 85-85-85 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। वहीं कुछ सीटों पर अभी सहमति बननी बाकी है। 18 सीटें अन्य सहयोगी दलों सपा, सीपीआईएम आदि को देने की बात कही गई है। कांग्रेस पार्टी ने अपनी पहली सूची में, पूर्व मंत्री नितिन राउत और बालासाहेब थोराट को क्रमशः नागपुर उत्तर और संगमनेर से, ज्योति एकनाथ गायकवाड़ को धारावी से, अमित देशमुख को लातूर शहर से और धीरज देशमुख को लातूर ग्रामीण से मैदान में उतारा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।