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अब चुनाव आयोग और EVM के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस

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चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी की शिकायतों को केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा खारिज किए जाने पर कांग्रेस ने तीखा जवाब दिया है। कांग्रेस का कहना है कि आयोग ने न केवल खुद को क्लीन चिट दे दी है, बल्कि शिकायत में उठाए गए कई बिंदुओं की गहन जांच किए बिना ही उन पर प्रतिक्रिया दे दी है।

कांग्रेस ने आयोग के जवाब से असंतुष्ट होकर दोबारा शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस ने यह भी इशारा किया है कि अगर चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया में सुधार नहीं किया, तो वह चुनाव आयोग और ईवीएम में कथित गड़बड़ी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने पर मजबूर होगी।

खानापूर्ति का आरोप
शनिवार को कांग्रेस के मीडिया और कम्युनिकेशन इंचार्ज चांदवीर हुड्डा ने चंडीगढ़ में प्रेस के सामने केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजा गया पत्र जारी किया। इस पत्र में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी उदयभान समेत नौ नेताओं के हस्ताक्षर थे। पत्र में कहा गया कि आयोग ने शिकायतों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है।

‘आयोग ने खुद को क्लीन चिट दी’
कांग्रेस का कहना है कि आयोग का जवाब अपमानजनक लहजे में था। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि आयोग ने अपनी भाषा में सुधार नहीं किया, तो कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया जाएगा। कांग्रेस ने कहा कि आयोग ने बिना किसी ठोस जांच के खुद को क्लीन चिट दे दी है। कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग यह भूल गया है कि वह संविधान के तहत स्थापित एक निकाय है।

13 अक्टूबर को दर्ज कराई थी शिकायत
कांग्रेस ने 13 अक्टूबर को हरियाणा चुनाव में ईवीएम में कथित गड़बड़ी के संबंध में शिकायत दर्ज की थी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि 26 सीटों पर मतगणना के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी देखी गई। 29 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत को खारिज करते हुए 1642 पृष्ठों के उत्तर में इसे आधारहीन और तथ्यविहीन बताया।

आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा था कि मतदान और मतगणना जैसे संवेदनशील समय में इस तरह के गैरजिम्मेदाराना आरोप अशांति और अव्यवस्था फैला सकते हैं। आयोग ने पिछले एक साल के पांच मामलों का हवाला देते हुए कांग्रेस को बिना सबूत आरोप लगाने से बचने की नसीहत दी। कांग्रेस ने आयोग के इस जवाब से असहमति जताते हुए कानूनी लड़ाई का संकेत दिया है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।