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सलमान खान को लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने फिर दी धमकी

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नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता सलमान खान को एक बार फिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से धमकी दी गई है। बीती रात मुंबई ट्रैफिक कंट्रोल रूम में मैसेज कर सलमान को धमकी दी गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज जांच शुरू कर दी है। धमकी देने वाली की पहचान अभी तक नहीं हुई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि धमकी भरा संदेश गुरुवार रात मुंबई यातायात पुलिस के व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर पर भेजा गया। अधिकारी ने बताया कि संदेश भेजने वाले ने अभिनेता को धमकाया और पांच करोड़ रुपए की मांग की। उसने दावा किया कि यह रकम बिश्नोई गिरोह की ओर से मांगी जा रही है। इसके अलावा व्यक्ति ने ‘मैं सिकंदर हूं’ गाने के गीतकार को भी धमकी दी।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में सलमान खान को जान से मारने की धमकियां कई बार मिली हैं। बीते दिनों भी मुंबई ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम फोन करके सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी गई थी। उस धमकी में सलमान खान को हिरण शिकार के मामले में मंदिर जाकर माफी मांगने और पांच करोड़ रुपये देने की मांग की गई थी। उससे पहले अक्तूबर में भी अभिनेता को धमकी मिली थी।

सलमान खान ने साल 1998 में राजस्थान में हम साथ-साथ हैं फिल्म की शूटिंग की थी। आरोप है कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही सलमान खान एक रात शूटिंग खत्म होने के बाद जोधपुर में शिकार के लिए निकले थे। आरोप है कि सलमान ने उस रात एक काले हिरण का शिकार किया था। इस काले हिरण को बिश्नोई समाज में बेहद पूजनीय माना जाता है। यही वजह है कि जैसे ही काले हिरण के शिकार मामले में सलमान खान का नाम सामने आया तो बिश्नोई समाज ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। साल 2018 में जोधपुर की अदालत ने सलमान खान को पांच साल जेल की सजा सुनाई, लेकिन दो दिन बाद ही सलमान खान को जमानत पर छोड़ दिया गया। इससे नाराज गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी थी। उसके बाद से ही लॉरेंस बिश्नोई, सलमान खान का जानी दुश्मन बना हुआ है।

सलमान खान राजस्थान के बीकानेर में स्थित बिश्नोई समाज के मुख्य मंदिर में आकर काले हिरण के शिकार के मामले में माफी मांग ले तो उनके हिसाब के बारे में कुछ सोचा जाएगा। हालांकि सलमान खान ने अभी तक माफी नहीं मांगी है और न ही इस पर कोई बयान दिया है। कुछ समय पहले सलमान खान के मुंबई स्थित घर पर फायरिंग भी हुई। वहीं बीते महीने ही सलमान खान के करीबी बाबा सिद्दीकी की भी मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया है।

सलमान खान के साथ ही गुरुवार को फिल्म अभिनेता शाहरुख खान को भी फैजान नाम के एक व्यक्ति ने जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोपी छत्तीसगढ़ के रायपुर का निवासी है और उसने शाहरुख खान को कथित तौर पर धमकी भरा कॉल किया।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।