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राज्य में मिली हार पर कांग्रेस का छलका दर्द, कहा- हम समझ नहीं पा रहे हुआ क्या, करेंगे आत्ममंथन

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला। एक बार फिर महायुति के सत्ता में काबिज होने के बाद कांग्रेस का दुख छलका है। उसने रविवार को कहा कि पार्टी और महा विकास अघाड़ी के अन्य सहयोगी दल हार के कारणों पर सामूहिक रूप से आत्ममंथन करेंगे।

भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने शनिवार को महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 230 पर जीत हासिल की और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महा विकास आघाड़ी को सिर्फ 46 सीटें मिलीं। इस पर कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले और अविश्वसनीय हैं।

उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा, ‘हम समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या हुआ। यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी की हार नहीं थी, बल्कि पूरे महा विकास अघाड़ी की हार थी। पहले हमें साफ समझना होगा कि आखिर क्या हुआ है। महाराष्ट्र और हरियाणा की हार के बाद हमें पूरी चुनाव प्रक्रिया पर आश्चर्य महसूस हो रहा है।

हार हम सबकी असफलता: वेणुगोपाल

यह पूछे जाने पर कि क्या सबसे पुरानी पार्टी को महाराष्ट्र चुनाव परिणामों में किसी तरह की गड़बड़ी होने का संदेह है, इस पर उन्होंने कहा कि वे हार के तुरंत बाद इस तरह के आरोप नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के गढ़ में भारी झटका लगा है। यह न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे गठबंधन की असफलता है। इसलिए, हम एक साथ बैठेंगे और सामूहिक रूप से इसके कारणों का आत्मचिंतन करेंगे।’

चुनाव आयोग ने घोषणा की कि भाजपा ने 132 सीटें, शिवसेना ने 57, जबकि अजित पवार वाली एनसीपी ने 41 सीटें जीती हैं। जबकि एमवीए में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवारों ने 10 सीटें, कांग्रेस ने 16, जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 20 सीटें जीतीं।

वायनाड में प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रचंड बहुमत से जीत के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की कोशिशों का नतीजा है। उन्होंने कहा, ‘पार्टी को वायनाड में इतने प्रचंड बहुमत की उम्मीद थी। मतदान के तुरंत बाद बहुमत को लेकर भारी चिंता जताई जा रही थी। लेकिन पार्टी के आंतरिक मूल्यांकन के बाद हमें यकीन था कि कम मतदान प्रतिशत प्रियंका के बहुमत पर असर नहीं डालेगा।’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वायनाड त्रासदी और उसके बाद के मुद्दे उन मुद्दों में से एक होंगे, जिन्हें प्रियंका लोकसभा में उठाएंगी। बार-बार वायनाड नहीं आने के विपक्ष के अभियान को खारिज करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि वह अपने कार्यों से उन्हें गलत साबित करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रियंका वायनाड की सांसद होने के साथ-साथ उत्तर भारतीय राजनीति में भी अपना हस्तक्षेप जारी रखेंगी।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड लोकसभा सीट पर शनिवार को हुए उपचुनाव में चार लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने भाई राहुल गांधी की जीत के अंतर को पीछे छोड़ दिया।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।