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स्वामी प्रसाद मौर्य के हिंदू विरोधी बयानों पर अखिलेश ने कही ये बड़ी ये

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नई दिल्ली।पीडीए नारे के साथ लोकसभा चुनाव में आगे बढ़ रही सपा अब ब्राह्मण समाज को भी साधने में जुट गई है। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित महाब्राह्मण महापंचायत इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद इस पंचायत में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और ब्राह्मण समाज से भाजपा को सत्ता से हटाने में साथ देने का आह्वान किया। महापंचायत में सपा का साथ देने के साथ ही पार्टी के पक्ष में प्रचार करने का भी निर्णय लिया गया।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित महाब्राह्मण (कर्मकांड कराने वाले ब्राह्मण) महापंचायत में सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते देश में नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार बढ़ा है। कालाधन बड़े पैमाने पर बढ़ रहा है। भारत को कर्जदार बनाया जा रहा है।

भाजपा सरकार से मुक्ति मिलने पर ही देश में खुशहाली आएगी। ब्राह्मण समाज के संघर्ष में सपा साथ रहेगी। उनकी हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि सपा सभी को साथ लेकर चलती है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार का काम जनता को धोखा देना है। वह लोगों को गुमराह करने में माहिर है।

भाजपा ने गरीबों के सम्मान को चोट पहुंचाई है। प्रदेश के विकास में भाजपा का कोई लेना देना नहीं है। पूंजीनिवेश के नाम पर सिर्फ तड़क भड़क सम्मेलन किए गए। भाजपा विकास के नाम पर सिर्फ पाखंड करती है। उसकी पूरी राजनीति झूठ छुपाने और सत्य पर पर्दा डालने की है।
इस मौके पर महाब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष टुनटुन पाण्डेय, राष्ट्रीय कार्यरत पार्टी के राम नक्षत्र पाण्डेय, शशि प्रताप सिंह, विधायक मनोज पाण्डेय व जयशंकर पाण्डेय ने भी अपने विचार रखे।

बैठक में स्वामी प्रसाद मौर्य की विवादित बयान को लेकर भी नाराजगी दिखी। नेताओं ने कहा कि उनके बयान से पार्टी को नुकसान हो रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बड़ा नुकसान स्वामी प्रसाद मौर्य की हिंदू व ब्राह्मणों पर की गई टिप्पणियां की वजह से हुआ है। अखिलेश ने सभी की बात सुनने के बाद यह माना कि उनके बयान गलत हैं। किसी भी धर्म, जाति व वर्ग को लेकर टिप्पणी करना गलत है। हम सभी जाति व धर्मों का सम्मान करते हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।