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चुनावों से पहले ओडिशा कांग्रेस ने जनता को दी ये पांच गारंटी

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नई दिल्ली। ओडिशा में विपक्षी कांग्रेस ने पांच सूत्री गारंटी का अनावरण किया है। इसका उद्देश्य युवाओं, महिलाओं, किसानों और बुजुर्ग सहित समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को दूर करना है। शनिवार को राज्य के सभी संगठनात्मक जिलों में पार्टी नेताओं ने यह गारंटी जारी की।

जहां ओपीसीसी अध्यक्ष ने नुआपाड़ा जिले में गारंटी जारी की, वहीं पूर्व ओपीसीसी प्रमुख प्रसाद हरिचंदन ने मीडिया प्रभारी (ओडिशा) बोबीता शर्मा के साथ इसे भुवनेश्वर में जारी किया।

बता दें कि गारंटी अलग-अलग नामों से है जैसे गृह ज्योति (बिजली लाभ), गृहलक्ष्मी (महिलाओं के लिए), कृषक बंधु (किसानों के लिए), युवा विकास (युवाओं के लिए) और जन कल्याण (सभी के लिए)। ‘गृह ज्योति’ के तहत, पार्टी ने सत्ता में आने पर हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया।

इसके अतिरिक्त, पार्टी ने 5 लाख युवाओं को रोजगार देने और बेरोजगारी भत्ते के रूप में 3,000 रुपये देने का वादा किया। उन्होंने सरकारी क्षेत्र में संविदा नियुक्तियों को रोकने की भी कसम खाई। महिलाओं के लिए, कांग्रेस महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए 5 लाख रुपये तक की ऋण माफी, 2,000 रुपये का मासिक भत्ता और एसटी और एससी महिलाओं के लिए 3,000 रुपये की गारंटी है।

पार्टी ने कहा कि गृहिणियों को 500 रुपये प्रति माह की रियायती दर पर रसोई गैस सिलेंडर मिलेगा। वहीं कर्ज माफी, प्रति क्विंटल धान पर 3,000 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य, 2,000 रुपये की पेंशन और धान खरीद गतिविधियों को नियमित करने से किसानों को फायदा होगा।

पुरानी पेंशन प्रणाली को बहाल करने का वादा किया
कांग्रेस ने जन कल्याण गारंटी के तहत प्रति व्यक्ति 25 लाख रुपये के स्वास्थ्य आश्वासन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर दो हजार रुपये प्रति माह करने का भी वादा किया। इसके अलावा, पार्टी ने सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 को लागू करने और पुरानी पेंशन प्रणाली को बहाल करने का वादा किया। साथ ही विभिन्न पोंजी योजनाओं द्वारा ठगे गए जमाकर्ताओं को छह महीने के भीतर पैसा लौटाने की भी प्रतिबद्धता जताई।

ओपीसीसी अध्यक्ष शरत पटनायक और कांटाबांजी विधायक संतोष सिंह सलूजा ने इस बात पर जोर दिया कि गारंटी का लक्ष्य राज्य विधानसभा में 90 सीटें जीतकर और सत्तारूढ़ बीजद और भाजपा के अधूरे वादों को संबोधित करके चुनाव में पार्टी के “9 से 90 मिशन” को पूरा करना है। कांग्रेस के पास वर्तमान में नौ विधायक हैं और उसका लक्ष्य 2024 के चुनावों में 90 सीटें जीतने का है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।