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भारत जोड़ो न्याय यात्रा राहुल गांधी के आने बाद शिवपुरी से होगी शुरू

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शिवपुरी । भारत जोड़ो न्याय यात्रा को शिवपुरी से आज राहुल गांधी के आने बाद शुरू होनी है। हालांकि पहले राहुल गांधी को हेलीकाप्टर से शिवपुरी पहुंचना था और उन्हें करीब साढ़े आठ बजे आना था। लेकिन राहुल गांधी के आने के शेड्यूल में बदलाव हुआ है। अब राहुल गांधी हेलीकाप्टर से नहीं बल्कि सड़क मार्ग से आएंगे। अब राहुल गांधी सुबह 10 बजे ग्वालियर पहुंचेगे और इसके बाद शिवपुरी में रोड शो करेंगे और संबोधित करेंगे। इसके बाद यात्रा आगे बढ़ जाएगी।

राहुल गांधी की भारत जोड़ाे न्याय यात्रा 3 मार्च को शिवपुरी आने वाली थी, लेकिन पटना में रैली के कारण यात्रा को एक दिन का विश्राम दे दिया गया। अब राहुल गांधी आज सोमवार को शिवपुरी आएंगे। वे सुबह 8.30 बजे हेलीकाप्टर से शिवपुरी पहुंचेंगे और सुबह नौ बजे से बाबू क्वाटर से उनका रोड शो शुरू होगा जो झांसी तिराहा तक चलेगा।

माधवचौक पर राहुल गांधी जनता को संबोधित करेंगे। पूर्व में यात्रा के तय कार्यक्रम के अनुसार आदिवासियों से संवाद और सतनवाड़ा में पत्रकार वार्ता भी थी, लेकिन इसे निरस्त कर दिया गया है। राहुल गांधी अब शिवपुरी के बदरवास में रात्रि विश्राम भी नहीं करेंगे। राहुल गांधी का रोड शो करीब 40 मिनट का होगा। इस दौरान सुरक्षा कारणों से कोई भी उन्हें फूल माला नहीं पहनाएगा। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से राहुल गांधी को सूत की माला देने को कहा है।

ग्वालियर से आने वाला यातायात ग्वालियर बाइपास से पोहरी चौराहा की ओर, गुना नाका से शहर की ओर आने वाले यातायात को पोहरी चौराहा एवं फतहेपुर रोड की ओर पोहरी रोड से अंदर शहर की ओर आने वाला यातायात अग्रसेन चौराहा से अस्पताल की ओर, अस्पताल चौराहा की ओर से आने वाला यातायात गांधी चौक से मिर्ची बाजार की ओर, दो बत्ती चौराहा से आने वाला नीलगर चौराहा की ओर, फिजीकल थाने की तरफ से आने वाला विष्णु मंदिर की ओर डावयर्ट किया जाएगा।

ग्वालियर नाका से झांसी तिराहा के मध्य थीम रोड पर सभी प्रकारा का यातायात प्रतिबंधित रहेगा। करई फोर लाइन तिराहा से सभी प्रकार के भारी वाहन पडोरा की ओर डायवर्टेट रहेंगे। करबला से हवाई पट्टी की ओर आने वाला यातायात एवं आइटीआइ तिराहा से हवाई पट्टी की ओर आने वाला यातायात प्रतिबंधित रहेगा। स्कूल बसें वीआइपी व्यवस्था सुबह 08.00 से 10.00 के मध्य डायवर्जन के अनुरूप विद्यार्थियों का आगमन सुनिश्चित करेंगी। इस दौरान पूर्व में जारी डायवर्जन प्लान के अनुसार समस्त भारी वाहन नोहरीकलां पुल से डायवर्टेट रहेंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।