मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़ी सिंगर कामिनी ठाकुर की कहानी उस हिम्मत और जज्बे की मिसाल है, जो सामाजिक सोच, पारिवारिक सीमाओं और कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़कर अपने सपनों को सच में बदल देती है। बचपन से गायन का शौक रखने वाली कामिनी ने आज करीब 15 वर्षों में हजारों मंच साझा कर अपनी अलग पहचान बनाई है।
कामिनी ठाकुर बताती हैं कि उन्हें सिंगिंग का शौक बचपन से था और उन्होंने 2010 से संगीत की शुरुआत की थी, जबकि 2012 में प्रोफेशनल तौर पर गायन को अपनाया। हालांकि ठाकुर परिवार से आने के कारण शुरुआती दौर में उन्हें परिवार और समाज से खास समर्थन नहीं मिला। उस समय महिलाओं का इस तरह मंच पर आना सहज नहीं माना जाता था। उन्होंने शौकिया तौर पर क्लासेस लीं और डिप्लोमा भी किया, लेकिन प्रोफेशन बनाने का फैसला परिस्थितियों और जिम्मेदारियों के चलते लेना पड़ा।
शादी से पहले सिंगिंग कर पाना उनके लिए लगभग असंभव था, लेकिन शादी के बाद पति का पूरा सहयोग उन्हें मिला। पति ही उन्हें विदिशा से भोपाल सिंगिंग क्लास के लिए लाते-ले जाते थे, जहां सिर्फ एक घंटे की क्लास के लिए पूरा दिन निकल जाता था। कामिनी कहती हैं कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके पति का सबसे बड़ा योगदान है। शुरुआती दौर में समाज के तानों और सोच के चलते उन्होंने धार्मिक और भक्ति गीतों से अपने करियर की शुरुआत की, ताकि लोगों को आपत्ति न हो, लेकिन इसके बावजूद समर्थन सीमित ही रहा।
करीब 15 साल के करियर में कामिनी ठाकुर अब तक लगभग 2500 शो कर चुकी हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में परफॉर्म किया है। आज वे सेमी-क्लासिकल, ग़ज़ल, बॉलीवुड, भक्ति और कॉर्पोरेट इवेंट्स सभी तरह के कार्यक्रम करती हैं, हालांकि उनकी निजी पसंद बॉलीवुड गायन ही है। कामिनी मानती हैं कि समय के साथ सोच बदली है, लेकिन आज भी समाज के एक बड़े हिस्से को बदलने की जरूरत है। उनका कहना है कि उन्हें अब भी संतुष्टि नहीं मिली है और





