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MP में भाजपा ने जो जनता से वादे किए हैं, वह उन्हें पूरे करने होंगे – उमंग

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हम जनता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की भूमिका का बखूबी निर्वहन करेंगे

भोपाल। मध्यप्रदेश में अभी हाल ही में कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव किए हैं। कांग्रेस ने संगठन में बदलाव करते हुए उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनाया है। डीबी न्यूज़ नेटवर्क से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए खाली खजाने से जनहित की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं।

हर वर्ग का उत्थान हो, यही हमारी सोच और विचारधारा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं आदिवासी समाज के साथ-साथ सभी वर्गों की बात करना चाहता हूं। आज मध्यप्रदेश में युवा, किसान, महिलाएं, गांव और गरीब की स्थित चिंताजनक है। उन्होंने कहा सरकार कहती है हमने इतने काम कराए हैं लेकिन जब बड़े शहरों में पानी की पाइपलाइन जा सकती है। तो छोटे शहरों में नर्मदा की पाइपलाइन क्यों नहीं जा सकती है। आप बड़े शहरों को तो पानी पिलाना चाहते हो लेकिन वह गांव जिनसे यह पाइपलाइन गुजर रही है उस क्षेत्र को भी सरकार को प्राथमिकता देनी चाहिए। मध्य प्रदेश में शिक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए, सरकार ने शिक्षा के लिए स्कूल खोले लेकिन स्कूल खोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण है गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा होना चाहिए। हम इनकी लड़ाई प्राथमिकता से लड़ेंगे, चाहे बिजली की बात हो, बिजली गांव में प्रॉपर मिलना चाहिए, चुनाव में तो भाजपा बोली कि हम 24 घंटे बिजली देंगे लेकिन इन्होंने गांव में आज तक 24 घंटे बिजली नहीं दी है। इसे लेकर मैं विधानसभा में कोट किया कि अगर आपकी बात सत्य हैं तो मैं नेता प्रतिपक्ष से इस्तीफा दे दूंगा।

20 साल में खाली खजाना और पहाड़ जैसा कर्ज
मध्य प्रदेश सरकार के खाली खजाने और कर्ज को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार हो चाहे राज्य सरकार हो यह कहते हैं की डबल इंजन की सरकार है पर केंद्र हो या राज्य सरकार दोनों पर ही कर्ज का जबरदस्त बोझ है। केंद्र में जो बड़े व्यापारी हैं, यह कॉर्पोरेट हैं यह लोग उनको फायदा पहुंचा रहे हैं। ऐसी पॉलिसी करनी पड़ेगी हिंदुस्तान में जो युवाओं के लिए पूरे हिंदुस्तान में स्टार्टअप खोले उनके स्टार्टअप्स की पॉलिसी क्या है इस पर भी सरकार को मंथन करना जरूरी है। हम आत्मनिर्भर होने की बात करते हैं पर हम आत्मनिर्भर तब होंगे जब देश में सिंचाई और बिजली की बात पूरी तरह साकार हो। आज किसानों को इन्होंने डेम से पानी तो दे दिया लेकिन बिजली नहीं दी है।

हम मध्यप्रदेश की हर बहन के साथ खड़े हैंमध्य प्रदेश में लाडली बहन योजना को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि जनता को सपना दिखा देते हैं। चुनाव के समय यह लाडली बहना योजना लाए, कर्ज लेकर इन्होंने लाडली बहना योजना तो शुरू कर दी मामा (पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान) ने काफी समय दिया। खजाने में पैसा है ही नहीं लेकिन यह सीधा-सीधा आंकड़ों का खेल चल रहा है। लेकिन जो वादे किए गए हैं वह पूरे हो आम जनता के विश्वास और वादे से हम खिलवाड़ नहीं होने देंगे। हम मध्यप्रदेश की हर बहन के साथ खड़े हैं।

जनता के मुद्दों की लड़ाई हम सब मिलकर लड़ेंगे
जब उनसे सवाल किया गया कि नए संगठन में तालमेल के साथ कैसे आगे बढ़ेंगे तो वह बोले हम सभी में जबरदस्त कोऑर्डिनेशन है जीतू पटवारी कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए हैं और ग्वालियर रीजन से आने वाले हेमंत कटारे उप नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं। हम तीनों को कांग्रेस ने यह बड़ी जिम्मेदारी दी है। हम लोग किस तरह से क्षेत्र में जाना है उस पर मंथन करते हुए जनता के मुद्दों की लड़ाई लड़ेंगे और आने वाले लोकसभा चुनाव में मजबूती से उभरेंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।