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रेलवे, राजमार्ग, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में पीएम मोदी के काम से परिवर्तन साफ दिखता है – राजीव

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नई दिल्ली। चंबा, भाजपा प्रत्याशी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ राजीव भारद्वाज ने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 वर्षों में भारत को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। यह परिवर्तन सभी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, चाहे वह रेलवे हो, राजमार्ग हो, स्वास्थ्य सेवा हो, शिक्षा आदि हो। ‘भारत का अमृतकाल’ ऐसे 100 सबसे प्रभावशाली पहलों को दरशाती है। यह प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के दृष्टिकोण की प्रतिबद्धता को दरशाती है।

उन्होंने कहा की पी.एम. आवास योजना ने देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पी.एम.ए. वाय. 2015 और 2016 में शुरू किए गए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, किफायती, सभी मौसम के लिए पक्का आवास प्रदान करने के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अंतर्निहित खामियों वाली पिछली सरकारी आवास योजनाओं के विपरीत यह पहल बेहतर निर्माण प्रौद्योगिकी, बढ़ी हुई निगरानी, पारदर्शिता, सुविधाओं और इसके तेजी से कार्यान्वयन में कुशल अभिसरण को प्राथमिकता देती है। महिलाओं के लिए स्वामित्व या सह-स्वामित्व को अनिवार्य करने वाली यह योजना एक सशक्तीकरण के उपकरण के रूप में कार्य करती है।
उन्होंने कहा की सुरक्षा और स्वामित्व गौरव की भावना के साथ-साथ गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करके, पी.एम.ए. वाय. ‘अमृतकाल’ में सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण कथा में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। जनवरी 2024 तक पी.एम.ए.वाय. शहरी 24 निर्माण प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके 1.18 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दी, जिनमें से 79.26 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है। पी.एम.ए.वाय. ग्रामीण के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती आवास को बढ़ावा देकर 2.94 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दी, जनवरी 2024 तक 2.54 करोड़ पूरे किए गए। इस योजना के तहत 70 फीसदी घर महिलाओं के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। पी.एम.ए.वाय. में त्वरित, टिकाऊ और लागत प्रभावी प्रोजेक्ट्स के लिए 24 प्रौद्योगिकियों और 33 सामग्रियों को अपनाना। एक मजबूत प्रबंधन सूचना प्रणाली (एम.आई.एस.) पी.एम.ए.वाय. में भौतिक और वित्तीय प्रगति का निर्बाध प्रबंधन सुनिश्चित करती है।
हिमाचल के आपदा के समय भी 21000 घर स्वीकृत किए गए है जिससे हिमाचल की जनता को बड़ा लाभ हुआ है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।