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CM मोहन यादव देंगे प्रदेश की लाड़ली बहनों को बड़ी सौगात आज

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भोपाल। प्रदेश की लाड़ली बहनों के खातों में बुधवार को धनराशि जारी की जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव 1,576 करोड़ रुपये अंतरित करेंगे। इसके साथ ही महिला सशक्तीकरण सप्ताह प्रारंभ हो जाएगा, जो 15 जनवरी तक चलेगा। इसमें जिलों में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। लाड़ली बहनों के खातों में राशि अंतरित करने का कार्यक्रम सुबह 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा।

प्रदेश में आज से मकर संक्रांति उत्सव की शुरुआत हो रही है और मुझे प्रसन्नता है कि पहले दिन हम ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ के अंतर्गत 1.29 करोड़ बहनों को ₹1576 करोड़ की सहायता प्रदान करने जा रहे हैं। इसमें वह सिंगल क्लिक के माध्यम से राशि लाड़ली बहनों के खातों में भेजेंगे। वहीं, महिला सशक्तीकरण सप्ताह के अंतर्गत जिला स्तर पर लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली ग्राम पंचायतों, प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित बालिकाओं का सम्मान, उल्लेखनीय कार्य करने वाले शौर्य दल के सदस्यों को भी सम्मानित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त ऐसी बालिकाएं, जिनके द्वारा सूचना देकर स्वयं का बाल विवाह रुकवाया हो, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी के अवसर पर सभी संप्रेक्षण गृह, वनस्टाप सेंटर, स्वाधार गृह में योग दिवस पर सूर्य नमस्कार किया जाएगा।

महिला हेल्पलाइन 181 एवं मुख्यमंत्री सशक्तीकरण योजना पर रेडियो पर चर्चा, समस्त जिलों के बाल गृहों में बच्चों को पाक्सो अधिनियम की जानकारी प्रदान कर “गुड टच-बैड टच” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा विशेषज्ञों और पुलिस साइबर सेल के माध्यम से साइबर सुरक्षा विषय पर लघु फिल्म का प्रदर्शन होगा।

वहीं पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसको लेकर ट्वीट किया है। उन्‍होंने कहा कि, ‘आपके आत्मसम्मान, खुशियों और सपनों के लिए जो किस्त आपके खाते में आती है, वो आज एक बार फिर आपके खातों में डाली जाएगी।’ पूर्व सीएम ने कहा कि ‘मेरी बहनों के जीवन में खुशियों का सूरज हमेशा चमकता रहे, यही कामना है और इसके लिए मैं जीवन पर्यंत प्रयास करता रहूंगा।’

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।